रिया सिन्हा: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की हवा में ‘जहरीली धुंध’ (टॉक्सिक स्मॉग) एक बार फिर बरकरार है। दिसंबर की शुरुआत के साथ ही वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का औसत AQI ‘बहुत खराब’ श्रेणी (300-400) में बना हुआ है, लेकिन बवाना, आनंद विहार और वजीरपुर जैसे कई इलाकों में हालात ‘गंभीर’ श्रेणी (400+) में पहुंच गए हैं, जहां लोगों को सांस लेने में भारी तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदूषण का खतरनाक स्तर: ‘गंभीर‘ श्रेणी में प्रमुख इलाके
दिल्ली से सटे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के शहरों में भी हवा की गुणवत्ता लगातार बिगड़ती जा रही है, जिससे लोगों का स्वास्थ्य संकट में है। नोएडा, गाजियाबाद, और ग्रेटर नोएडा जैसे प्रमुख शहरों का AQI भी 400 के आंकड़े को पार कर गया है, जो ‘गंभीर’ श्रेणी को दर्शाता है। यह स्थिति बताती है कि प्रदूषण सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे NCR को अपनी चपेट में ले चुका है। धीमी हवा की गति और बढ़ती ठंड के कारण प्रदूषक कण वायुमंडल की निचली परत में फँस गए हैं, जिससे स्मॉग की मोटी चादर पूरे क्षेत्र पर छा गई है।
NCR में भी खतरनाक होती हवा, स्वास्थ्य पर सीधा असर
विशेषज्ञों और पर्यावरण एजेंसियों की मानें तो इस प्रदूषण का मुख्य कारण स्थानीय स्रोत, विशेषकर वाहनों का उत्सर्जन, निर्माण कार्यों की धूल और औद्योगिक प्रदूषण हैं। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के PM 2.5 प्रदूषण में परिवहन का योगदान सबसे अधिक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस जहरीली हवा को बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए ‘जानलेवा’ बताया है। सरकार और प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियों ने कुछ प्रतिबंध लागू किए हैं, लेकिन जब तक जमीनी स्तर पर कठोर और निरंतर कार्रवाई नहीं होती, तब तक इस ‘दमघोंटू’ संकट से राहत मिलने की उम्मीद कम है।

