रिया सिन्हा: भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन की तैयारी को और मजबूती मिली है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने हाल ही में पैराशूट ड्रॉप टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा किया। यह परीक्षण अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत अहम माना जा रहा है।
राजस्थान के पोखरण में परीक्षण
इसरो ने यह परीक्षण राजस्थान के पोखरण रेंज में किया। इसमें गगनयान के क्रू मॉड्यूल के समान आकार और वजन वाले मॉडल को एक विमान से ऊँचाई पर छोड़ा गया। जैसे ही मॉडल ने निर्धारित ऊँचाई पर पहुँचकर नीचे गिरना शुरू किया, उस पर लगे पैराशूट सिस्टम ने सक्रिय होकर सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित की।
सुरक्षा को लेकर अहम प्रयोग
गगनयान मिशन के तहत भारतीय अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की कक्षा में भेजे जाएंगे और वापसी के दौरान उन्हें क्रू मॉड्यूल के जरिए सुरक्षित समुद्र या जमीन पर उतारना होगा। इस प्रक्रिया में पैराशूट सिस्टम की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। परीक्षण के दौरान देखा गया कि आपात स्थिति या तेज गति में भी यह पैराशूट सिस्टम पूरी तरह काम करने में सक्षम है।
इसरो का बयान
इसरो के वैज्ञानिकों ने कहा कि “यह सफल परीक्षण गगनयान मिशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अब तक कई चरणों में पैराशूट और लैंडिंग सिस्टम की जांच की जा चुकी है और आगे भी कुछ और परीक्षण किए जाएंगे ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि की संभावना न रहे।”
2025 में पहला मानवयुक्त अभियान
गगनयान मिशन के तहत भारत वर्ष 2025 में अपना पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष अभियान लॉन्च करेगा। इसमें तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्री पांच से सात दिन तक पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में रहेंगे। पैराशूट ड्रॉप टेस्ट की सफलता ने इस मिशन की तैयारियों को और गति दे दी है।

