रिपोर्ट, काजल जाटव: कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने हाल ही में मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि यह सरकार पिछले 11 सालों से लोकतंत्र को छोटे-छोटे कदमों में खत्म करने की कोशिशें कर रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विपक्ष, खासकर बिहार में, ‘वोट चोरी’ जैसे मुद्दों पर पूरी तरह से सही था, और अब सुप्रीम कोर्ट ने भी मान लिया है कि चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों के बीच ‘विवाद’ की स्थिति बनी हुई है।
खड़गे का आरोप लोकतंत्र पर
खड़गे के मुताबिक, मोदी सरकार ने देश के लोकतांत्रिक सिस्टम को कमजोर करने के लिए एक प्लान बना रखा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष बार-बार संविधान, आजादी से बोलने का अधिकार और लोकतंत्र के खिलाफ हो रहे हमलों का जिक्र करता रहा है, लेकिन सरकार इन्हें दबाने में लगी है। उनका कहना है कि ED और CBI जैसी केंद्रीय एजेंसियों का गलत इस्तेमाल हो रहा है, और हमारे संवैधानिक संस्थानों की स्वतंत्रता भी खत्म हो रही है।
खड़गे ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल उठाना और असहमति प्रकट करना जरूरी है, लेकिन मोदी सरकार विपक्ष की आवाज सुनने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने 1962 के भारत-चीन युद्ध का उदाहरण देते हुए बताया कि उस वक्त पंडित नेहरू ने एक फैसला लिया था और विपक्ष की बात सुनी थी, और कहा था कि जनता से कुछ भी छुपाया नहीं जाएगा। खड़गे का मानना है कि आज की सरकार में ऐसी पारदर्शिता का अभाव है, जो लोकतंत्र के लिए खतरा बन सकता है।
बिहार का ‘वोट चोरी’ मामला और सुप्रीम कोर्ट का नजरिया
खड़गे ने खास तौर पर बिहार में चल रहे वोट चोरी (SIR) के मुद्दे को उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इसे संसद में चर्चा करना चाहता था, लेकिन सरकार ने हठधर्मिता दिखाते हुए ऐसा होने नहीं दिया, और चुनाव आयोग का पक्ष लिया। उनका कहना है कि मतदाता सूची में हेरफेरी के आरोप लगे हैं, और हजारों मतदाताओं के नाम जानबूझकर हटाए गए हैं।
सबसे तो ये कि खड़गे ने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस बात को मान लिया है कि विपक्ष का नजरिया सही था। कोर्ट ने बिहार के इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों के बीच ‘विवाद’ की स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण है। कोर्ट ने चुनाव आयोग को आदेश दिया कि उस 65 लाख मतदाताओं का ब्यौरा वेबसाइट पर डाला जाए, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, और यह भी पता लगाया जाए कि ऐसा क्यों किया गया। इस फैसले से यह साफ होता है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है और चुनाव आयोग के ऊपर सवाल उठ रहे हैं।
विपक्ष का आंदोलन और आगे की राह
खड़गे ने कहा कि बिहार में वोट चोरी के मुद्दे को लेकर पूरे विपक्ष ने मिलकर विरोध जताया। उन्होंने बताया कि यह केवल एक चुनाव नहीं है, बल्कि संविधान और लोकतंत्र को बचाने की कोशिश है। उन्होंने ये भी कहा कि अगर हम जागरूक नहीं रहे, तो हमारा वोट का अधिकार खतरे में पड़ सकता है।
खड़गे का मानना है कि भी विपक्ष को मिलकर EVM में दखल, चुनाव फंड की पारदर्शिता और सरकारी नियंत्रण जैसे मुद्दों को उठाना चाहिए। उन्होंने फिर से यह भी कहा कि वोट डालने के लिए बैलेट पेपर का इस्तेमाल करना बेहतर रहेगा। यह आंदोलन दिखाता है कि विपक्ष मोदी सरकार के खिलाफ इन सवालों को उठाता रहेगा और 2029 के लोकसभा चुनाव को इन मुद्दों का बड़ा केंद्र बनाने की कोशिश करेगा।
इस तरह, मल्लिकार्जुन खड़गे का ये बयान सीधे मोदी सरकार को निशाना बनाता है, साथ ही विपक्ष की सोच को भी दिखाता है कि वे लोकतंत्र और संविधान की मूल्यों की रक्षा को लेकर अपने संघर्ष को आगे बढ़ाना चाहते हैं।
