Baljinder Kaur: एक समय था जब भारत के लगभग हर घर में टीवी मनोरंजन का सबसे बड़ा साधन हुआ करता था। शाम होते ही पूरा परिवार टीवी के सामने बैठकर सीरियल, खबरें या क्रिकेट मैच देखा करता था लेकिन अब यह आदत तेजी से बदल रही है। पिछले 6 वर्षों में करीब 4 करोड़ भारतीय घरों ने केबल और डिश टीवी कनेक्शन छोड़ दिए हैं।

क्यों घट रहे हैं केबल और डिश टीवी यूज़र?
OTT प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती लोकप्रियता: Netflix, Amazon Prime Video, Disney+ Hotstar, JioCinema और YouTube जैसे प्लेटफॉर्म्स ने दर्शकों को ऑन-डिमांड कंटेंट की सुविधा दी है जिससे लोग तय समय पर टीवी देखने की मजबूरी से मुक्त हो गए हैं।
मोबाइल बना नया टीवी: आज भारत में करोड़ों लोग स्मार्टफोन पर ही अपना ज्यादातर समय बिताते हैं। सस्ता डेटा और 4G/5G नेटवर्क ने मोबाइल को एक मिनी टीवी में बदल दिया है। खासकर युवा वर्ग टीवी की बजाय मोबाइल स्क्रीन को ज्यादा पसंद कर रहा है।
केबल और डिश का बढ़ता खर्च: केबल और DTH कनेक्शन के मासिक पैक लगातार महंगे होते जा रहे हैं। TRAI के नए नियमों के बाद कई चैनलों के अलग-अलग शुल्क ने उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाला।
बदलती कंटेंट पसंद: टीवी पर दिखने वाले कई धारावाहिक सालों तक खिंचते रहते हैं। वहीं OTT पर सीमित एपिसोड में दमदार कहानी देखने को मिलती है। यही वजह है कि दर्शक नए और अलग कंटेंट की तलाश में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की ओर जा रहे हैं।

आंकड़े क्या कहते हैं?

ब्रॉडकास्ट इंडस्ट्री से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक:
2018 के बाद से केबल और DTH यूज़र्स की संख्या में लगातार गिरावट आई है।
करीब 4 करोड़ घरों ने टीवी कनेक्शन बंद कर दिए।
खासतौर पर शहरी और युवा दर्शकों में यह ट्रेंड ज्यादा देखने को मिला है।

क्या टीवी पूरी तरह खत्म हो जाएगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि टीवी पूरी तरह खत्म नहीं होगा लेकिन उसका स्वरूप जरूर बदलेगा। लाइव न्यूज, खेलों का सीधा प्रसारण, बड़े रियलिटी शोज़ अब भी टीवी की सबसे बड़ी ताकत बने हुए हैं। हालांकि बुज़ुर्ग दर्शकों और ग्रामीण इलाकों में टीवी की पकड़ अब भी मजबूत बनी हुई है।

भविष्य में टीवी का रास्ता क्या होगा?
टीवी इंडस्ट्री अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश कर रही है। कई टीवी चैनल अपने कंटेंट को OTT और मोबाइल ऐप्स पर भी उपलब्ध करा रहे हैं। आने वाले समय में हाइब्रिड मॉडल (टीवी + डिजिटल) ही सबसे कारगर साबित हो सकता है।

भारत में टीवी का सुनहरा दौर भले ही ढलान पर हो लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि टीवी खत्म हो रहा है। दर्शकों की पसंद और तकनीक के साथ टीवी भी खुद को बदल रहा है। सवाल यह नहीं है कि टीवी रहेगा या नहीं बल्कि यह है कि टीवी खुद को कितना और कैसे बदल पाता है।

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