रिया सिन्हा: दिल्ली नगर निगम (MCD) के 12 वार्डों में होने वाले उपचुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) में टिकट वितरण को लेकर भारी खींचतान मची हुई है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और स्थानीय कार्यकर्ता इन सीटों पर अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं, जिससे चयन समिति के लिए फैसला लेना मुश्किल हो गया है। अधिकांश वार्डों में एक से अधिक मजबूत दावेदार होने के कारण, उम्मीदवारों के नामों पर सहमति नहीं बन पा रही है और चयन प्रक्रिया अंतिम चरण में फंस गई है।
टिकट बंटवारे को लेकर उलझन बरकरार
उपचुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए भाजपा ऐसे उम्मीदवार उतारना चाहती है जो स्थानीय समीकरणों और जनता के बीच मजबूत पकड़ रखते हों। हालांकि, यही कारण टिकट की मांग बढ़ने का बन गया है। जिन वार्डों पर पहले भाजपा का कब्जा था, वहां के स्थानीय नेताओं का मानना है कि उन्हें ही दोबारा मौका मिलना चाहिए, जबकि नए चेहरों को शामिल करने का भी दबाव है। कई वार्डों में पूर्व पार्षदों के रिश्तेदार भी टिकट मांग रहे हैं, जिससे पार्टी के भीतर गुटबाजी की आशंका भी बढ़ रही है।
कई दावेदारों ने बढ़ाई चुनौती और गुटबाजी
इस अंदरूनी कलह को शांत करने और सही उम्मीदवार चुनने के लिए, भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे न केवल उम्मीदवारों के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, बल्कि नाराज दावेदारों को मनाकर एकजुटता बनाए रखने की कोशिश भी कर रहे हैं। पार्टी का लक्ष्य है कि टिकट बंटवारे के कारण किसी भी वार्ड में विरोध का सामना न करना पड़े, ताकि वह अपने नौ पुराने वार्डों पर कब्जा बरकरार रखने के साथ-साथ अन्य पर भी जीत हासिल कर सके। इन उपचुनावों को दिल्ली के राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण शक्ति परीक्षण के रूप में देखा जा रहा है।

