Muskan Garg: उत्तर प्रदेश में एक ऐतिहासिक और व्यापक सुरक्षा अभ्यास होने जा रहा है। राज्य के सभी 75 जिलों में एक साथ ‘ब्लैक आउट’ सायरन बजाया जाएगा और तय समय के लिए सभी सार्वजनिक व निजी लाइटें बंद करनी होंगी। यह अभ्यास किसी वास्तविक खतरे का संकेत नहीं, बल्कि आपदा और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारी का हिस्सा है। प्रशासन का मकसद है, जनता, संस्थानों और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को परखना।
क्या है ब्लैक आउट मॉकड्रिल?
ब्लैक आउट मॉकड्रिल वह अभ्यास है, जिसमें संभावित हवाई हमले, आतंकी गतिविधि या अन्य गंभीर आपदाओं की स्थिति में रोशनी बंद कर इलाके को अंधेरे में रखा जाता है, ताकि संवेदनशील ठिकानों की पहचान न हो सके। सायरन बजते ही नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने, अनावश्यक आवाज़ और रोशनी से बचने जैसे निर्देशों का पालन करना होता है।
क्यों जरूरी है यह अभ्यास?
बदलते वैश्विक सुरक्षा हालात और आपदा जोखिमों को देखते हुए राज्य सरकार और गृह विभाग इस तरह की मॉकड्रिल को अत्यंत आवश्यक मानते हैं। इससे:
• आपातकालीन सेवाओं की तत्परता परखी जाती है।
• आम नागरिकों में जागरूकता बढ़ती है।
• अफवाहों से बचाव और अनुशासन विकसित होता है।
• वास्तविक संकट में जान-माल के नुकसान को कम करने में मदद मिलती है।
सायरन बजते ही नागरिकों को क्या करना होगा?
• घर, दुकान, कार्यालय की सभी लाइटें बंद करें।
• खिड़कियों पर पर्दे या कवर लगाएं।
• अनावश्यक बाहर निकलने से बचें।
• अफवाहों पर ध्यान न दें, केवल प्रशासनिक निर्देश मानें।
• मोबाइल की फ्लैशलाइट/टॉर्च का उपयोग न करें।
प्रशासन की पूरी तैयारी:
इस मॉकड्रिल में पुलिस, सिविल डिफेंस, फायर ब्रिगेड, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की सक्रिय भागीदारी रहेगी। अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और सरकारी इमारतों में विशेष समन्वय रहेगा। स्वयंसेवी संगठन और एनसीसी/एनएसएस के छात्र भी सहयोग करेंगे।
अफवाह नहीं, सतर्कता जरूरी:
प्रशासन ने साफ किया है कि घबराने की कोई जरूरत नहीं। यह सिर्फ एक अभ्यास है। नागरिकों से सहयोग की अपील की गई है, ताकि यूपी किसी भी आपात स्थिति में पूरी तरह तैयार रहे।
साफ है, सुरक्षा अभ्यास में सहभागिता ही सुरक्षित भविष्य की कुंजी है।
