Baljinder Kaur: लोहड़ी पंजाब का सबसे प्रमुख और उल्लास से भरा पर्व है जो हर साल 13 जनवरी के आसपास मनाया जाता है। यह त्योहार नई फसल, खासकर रबी की फसल के स्वागत और सर्दियों के अंत का प्रतीक माना जाता है। लोहड़ी की रात अलाव जलाया जाता है, लोग उसके चारों ओर नाचते-गाते हैं और पारंपरिक गीत गाते हैं। इन्हीं गीतों में सबसे लोकप्रिय और भावनात्मक लोकगीत है— ‘सुंदर मुंदरिये’। यह गीत सिर्फ एक धुन नहीं बल्कि पंजाब की लोक-संस्कृति, इतिहास और सामूहिक खुशी का प्रतीक है।
‘सुंदर मुंदरिये’ गीत के बोल
लोहड़ी के मौके पर गाया जाने वाला यह गीत आमतौर पर समूह में गाया जाता है। इसके कुछ प्रसिद्ध बोल इस प्रकार हैं:
सुंदर मुंदरिये हो!
तेरा कौन विचारा हो!
दुल्ला भट्टी वाला हो!
दुल्ले धी वियाही हो!
शेर शक्कर पाई हो!
कुड़ी दा लाल पटाका हो!
गीत को तालियों और “हो!” की आवाज़ के साथ गाया जाता है।
गीत का अर्थ और भाव
‘सुंदर मुंदरिये’ गीत का सीधा अर्थ सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं है बल्कि इसके पीछे गहरी लोक-भावना छिपी है।
सुंदर मुंदरिये: यहां ‘सुंदर’ सुंदर लड़की या नवविवाहिता का प्रतीक है जबकि ‘मुंदरिये’ स्नेह और अपनापन दर्शाता है।
दुल्ला भट्टी: यह गीत पंजाब के लोकनायक दुल्ला भट्टी को समर्पित है, जिन्हें पंजाबी संस्कृति में रॉबिन हुड जैसा माना जाता है। कहा जाता है कि उन्होंने गरीब लड़कियों की शादी करवाई और उन्हें सम्मान दिलाया।
शेर, शक्कर: ये मिठास, समृद्धि और खुशहाली के प्रतीक हैं, जो लोहड़ी के पर्व से जुड़े हैं।
इस तरह यह गीत नारी सम्मान, सामाजिक न्याय और सामूहिक खुशी का संदेश देता है।
लोहड़ी और ‘सुंदर मुंदरिये’ का संबंध
लोहड़ी पर ‘सुंदर मुंदरिये’ गाना एक परंपरा बन चुका है। बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग—सभी मिलकर इसे गाते हैं। खासकर जिन घरों में नई शादी हुई हो या बच्चा जन्मा हो वहां इस गीत की रौनक और बढ़ जाती है। गीत के साथ लोग मूंगफली, रेवड़ी, तिल और गज्जक अलाव में अर्पित करते हैं, जिसे समृद्धि की कामना माना जाता है। आज के दौर में भी उतना ही लोकप्रिय ,भले ही समय बदल गया हो, लेकिन ‘सुंदर मुंदरिये’ की लोकप्रियता आज भी वैसी ही है। स्कूलों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, टीवी शो और सोशल मीडिया पर यह गीत लोहड़ी के समय जरूर सुनाई देता है।
‘सुंदर मुंदरिये’ सिर्फ एक लोकगीत नहीं, बल्कि पंजाब की आत्मा है। लोहड़ी के पर्व पर इसे मिलकर गाना भाईचारे, प्रेम और परंपरा को जीवित रखने का सबसे सुंदर तरीका है। इस लोहड़ी, अलाव के चारों ओर खड़े होकर जब सब मिलकर “सुंदर मुंदरिये हो!” गाते हैं तो त्योहार की खुशी कई गुना बढ़ जाती है।
