Toshi Gupta: आप में से कई लोग अपने बच्चों के साथ सख्ती से पेश आते होगे। या कभी कभी उन्हें डांट देते होगे। जिससे बच्चे अपने मां-बाप से बात करने से डरते हैं। लेकिन इसी सब के बीच जेलीफिश पेरेंटिंग का ट्रेंड जोरों पर हैं। यह पेरेंटिंग का नया तरीका हैं। जिससे हर कोई अपना रहा हैं। क्या आप भी यह तरीका अपनाना चाहते हैं? अगर हाँ, तो चलिए जानते हैं , जेलीफिश पेरेंटिंग क्या हैं ? इससे क्या फायदे और नुकसान हैं ?
क्या होती हैं जेलीफिश पेरेंटिंग ?
जेलीफिश पेरेंटिंग एक तरीके का नया सिस्टम हैं। जिसमें पेरेंटस अपने बच्चों को इनडिपेनडेन्ट बनाने का नया तरीका अपना रहे हैं। इस सिस्टम में मां- बाप अपने बच्चों को सारी पाबंदियों से मुक्त कर देते हैं। अगर आसान भाषा मे कहे तो,पेरेंट्स बच्चों को खुली छूठ दें देते हैं। जेलीफिश पेरेंटिंग मे सभी बच्चे अपने लाइफ डिसिशन खुद लेते हैं। वह अपनी जिदगी को अपने हिसाब से जीते हैं। इस सिस्टम में बच्चों के ऊपर कोई बॉउंडेशन नहीं होती हैं।
जेलीफिश पेरेंटिंग के क्या फायदे हैं ?
जेलीफिश पेरेंटिंग के बहुत से फायदे हो सकते हैं। जैसे-
1- इसकी मदद से बच्चे अपने फेसले खुद ले सकते हैं।
2- जेलीफिश पेरेंटिंग से बच्चे इनडिपेनडेन्ट बनते हैं।
3- इस पेरेंटिंग के तरीके से बच्चें अपने मां-बाप से बिना झिझक के बाते शेयर कर सकते हैं।
4- इसके अलावा, बच्चों की कम्युनिकेशन स्किल अच्छी होती हैं।
5- साथ ही साथ बच्चें सही गलत में अंतर करना सीखते हैं।
क्या जेलीफिश पेरेंटिंग हानिकारक भी हो सकती हैं ?
जी हां, बिल्कुल जेलीफिश पेरेंटिंग जितनी अच्छी दिखती हैं, उतनी होती नहीं। इसके बहुत से नुकसान हैं। जो मां-बाप और बच्चों को नुकसान पहुँचा सकते हैं। जैसे-
1- बच्चे ना समझी में बहुत से गलत फैसले ले लेते हैं।
2- वह आसानी से गलत लोगों के भय्कावें में आ जाते हैं।
3- बच्चे सही सें अपनी जिम्मेदारी नहीं समझ पाते।
4- साथ ही साथ कभी कभी अपने लिए गलत राह चुन लेते हैं।
