रिया सिन्हा: भारत के चहेते हास्य कलाकार राजू श्रीवास्तव की बर्थ एनिवर्सरी है। 25 दिसंबर 1963 को उत्तर प्रदेश के कानपुर में जन्मे राजू श्रीवास्तव ने अपनी अनूठी शैली और देसी अंदाज से करोड़ों लोगों के दिलों में जगह बनाई। वे केवल एक कलाकार नहीं, बल्कि एक ऐसी शख्सियत थे जिन्होंने स्टैंड-अप कॉमेडी को भारत के घर-घर तक पहुँचाया। उनके जाने के बाद भी उनकी कॉमेडी की क्लिप्स और ‘गजोधर भैया’ के किस्से सोशल मीडिया पर आज भी उतने ही लोकप्रिय हैं।
कानपुर की गलियों से मुंबई के मंच तक का सफर
राजू श्रीवास्तव का असली नाम सत्य प्रकाश श्रीवास्तव था। उनके पिता रमेश चंद्र श्रीवास्तव एक प्रसिद्ध कवि थे, जिन्हें लोग ‘बलाई काका’ के नाम से जानते थे। राजू को बचपन से ही मिमिक्री का शौक था और वे अक्सर अमिताभ बच्चन की नकल उतारा करते थे। करियर के शुरुआती दिनों में उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा; एक समय ऐसा भी था जब उन्होंने मुंबई में गुजारा करने के लिए ऑटो तक चलाया। लेकिन उनकी मेहनत रंग लाई और धीरे-धीरे उन्हें फिल्मों में छोटे-मोटे रोल मिलने शुरू हुए।
‘द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज‘ और गजोधर भैया का उदय
राजू श्रीवास्तव के करियर में असली मोड़ साल 2005 में आया, जब उन्होंने टीवी शो ‘द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज’ में हिस्सा लिया। इस मंच पर उन्होंने ‘गजोधर भैया’ के काल्पनिक किरदार को पेश किया, जो रातों-रात पूरे देश का पसंदीदा बन गया। उनकी खासियत यह थी कि वे आम आदमी की छोटी-छोटी परेशानियों और रोजमर्रा की घटनाओं को व्यंग्यात्मक तरीके से पेश करते थे। वे बिना किसी फूहड़पन के केवल अपने चेहरे के हाव-भाव और देसी लहजे से लोगों को लोटपोट कर देते थे।
राजनीति और सामाजिक सरोकार में योगदान
कॉमेडी की दुनिया के अलावा राजू श्रीवास्तव राजनीति और समाज सेवा में भी सक्रिय रहे। उन्होंने 2014 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उन्हें ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के लिए नामित किया गया। उन्होंने स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करने में अहम भूमिका निभाई। 21 सितंबर 2022 को दिल्ली के एम्स (AIIMS) में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया, जिससे कला जगत में एक ऐसा शून्य पैदा हो गया जिसे भरना नामुमकिन है।

