रिया सिन्हा: 11 दिसंबर 2025 को हिंदी सिनेमा के महानतम अभिनेताओं में से एक, दिलीप कुमार की 103वीं जयंती है। उनका जन्म 11 दिसंबर 1922 को ब्रिटिश भारत के पेशावर (अब पाकिस्तान) में मोहम्मद युसुफ खान के रूप में हुआ था। पाँच दशकों से अधिक के शानदार करियर में उन्होंने 65 से अधिक फिल्मों में काम किया और अपनी सशक्त अदाकारी से लाखों दर्शकों के दिलों पर राज किया। भारतीय सिनेमा के इस ‘ट्रैजेडी किंग’ को उनकी बहुमुखी प्रतिभा और भावनात्मक किरदारों को जीवंत करने की क्षमता के लिए हमेशा याद किया जाएगा।
‘ट्रैजेडी किंग‘ का खिताब और करियर की शुरुआत
दिलीप कुमार को उनके शुरुआती करियर में दुखद भूमिकाएँ (ट्रैजिक रोल) निभाने के लिए ‘ट्रैजेडी किंग’ का खिताब मिला। ‘दीदार’ (1951) और ‘देवदास’ (1955) जैसी फिल्मों में उनके गहन और मार्मिक अभिनय ने उन्हें यह उपनाम दिलाया। उनके करियर की शुरुआत 1944 में आई फिल्म ‘ज्वार भाटा’ से हुई थी। 1947 में आई ‘जुगनू’ उनकी पहली बड़ी हिट साबित हुई। हालांकि, 1949 में राज कपूर के साथ उनकी फिल्म ‘अंदाज़’ ने उन्हें एक स्थापित स्टार बना दिया।
कालजयी फिल्में और अटूट विरासत
दिलीप कुमार ने न केवल दुखद भूमिकाएँ निभाईं, बल्कि उन्होंने ‘आज़ाद’ (1955) और ‘कोहिनूर’ (1960) जैसी फिल्मों में कॉमेडी और ‘राम और श्याम’ (1967) में डबल रोल निभाकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया। उनकी सबसे कालजयी फिल्मों में ‘मुगल-ए-आजम’ (1960) का सलीम और ‘नया दौर’ (1957) प्रमुख हैं, जो आज भी भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम अध्याय माने जाते हैं। उन्होंने अभिनय के लिए आठ बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार जीतकर एक रिकॉर्ड भी बनाया, जो आज तक कायम है।
पुरस्कारों से सम्मानित जीवन
अपने शानदार योगदान के लिए दिलीप कुमार को भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण (1991) और सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण (2015) से सम्मानित किया गया था। उन्हें भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान दादा साहेब फाल्के पुरस्कार (1994) से भी नवाजा गया था। उनकी विरासत आज भी युवा अभिनेताओं को प्रेरणा देती है, और उनके जन्मदिन पर फिल्म जगत उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहा है। 7 जुलाई 2021 को 98 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया था।

