Muskan Garg: तीन दिवसीय वनमाली कथा सम्मान समारोह के तीसरे दिन साहित्यिक ऊर्जा, भावनात्मक अभिव्यक्ति और समकालीन विमर्श का अद्भुत संगम देखने को मिला। रचना पाठ से लेकर युवा कहानी पर गंभीर परिचर्चा और फागुनी गीतों की मधुर प्रस्तुतियों तक, पूरा दिन साहित्य और संस्कृति को समर्पित रहा।
रचना पाठ: रिश्तों और यथार्थ की मार्मिक अभिव्यक्ति:
समारोह के प्रथम सत्र में सम्मानित रचनाकारों का ‘रचना पाठ’ आयोजित किया गया। सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि-कथाकार एवं वनमाली सृजन पीठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष चौबे ने की तथा वरिष्ठ आलोचक महेश दर्पण का विशेष सान्निध्य रहा।
वरिष्ठ कथाकार उर्मिला शिरीष ने अपनी चर्चित कहानी ‘यात्रा’ का अत्यंत मार्मिक पाठ प्रस्तुत किया, जिसमें माँ और बेटी के संबंधों की भावनात्मक गहराई को बेहद खूबसूरती से उकेरा गया।
वहीं वनमाली युवा कथा सम्मान से सम्मानित युवा कथाकार कुणाल सिंह ने पंजाब की पृष्ठभूमि पर आधारित अपनी कहानी ‘डूब’ का प्रभावशाली पाठ किया। कहानी में अलगाववाद के कारण उत्पन्न पारिवारिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक प्रभावों को गंभीरता और संवेदनशीलता से उठाया गया।
अध्यक्षीय वक्तव्य में संतोष चौबे ने दोनों रचनाकारों को कहानी का सशक्त हस्ताक्षर बताते हुए कहा कि उनकी कहानियों का “तापक्रम” ही उनकी विशेषता है।
महेश दर्पण ने कहा कि कुणाल सिंह की कहानी हिंदुस्तानी ज़बान की तहजीब को गहराई से रेखांकित करती है, जबकि उर्मिला शिरीष की कहानी काव्यात्मक भाषा में अपने समय की महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति है।
इस अवसर पर आईसेक्ट पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘दस कहानियाँ उर्मिला शिरीष’ का लोकार्पण अतिथियों द्वारा किया गया। सत्र का संचालन युवा आलोचक अरुणेश शुक्ल ने किया।
समकालीन युवा कहानी पर गंभीर परिचर्चा:
द्वितीय सत्र में “समकालीन युवा कहानी की संवेदनाएं और सामाजिक परिदृश्य” विषय पर विचारोत्तेजक परिचर्चा आयोजित हुई। सत्र में गीताश्री, संजय शेफर्ड और कैफी हाशमी वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। अध्यक्षता मुकेश वर्मा ने की, जबकि शशांक ने सान्निध्य वक्तव्य दिया। संचालन युवा कथाकार कुणाल सिंह ने किया।
कैफी हाशमी ने कहा कि आज के युवा रचनाकार फैंटेसी, प्रतीक और प्रयोगधर्मी शिल्प के माध्यम से अपनी अभिव्यक्ति को अधिक प्रभावशाली बना रहे हैं।
संजय शेफर्ड ने नई हिंदी पर लगने वाले गैर-साहित्यिक होने के आरोपों का खंडन किया।उन्होंने कहा कि डिजिटल अरेस्ट, साइबर अपराध, वर्चुअल व्यापार और समानांतर डिजिटल दुनिया जैसे विषयों ने नए यथार्थ को जन्म दिया है, जिस पर गंभीर कथा लेखन अपेक्षित है।
गीताश्री ने कहा कि युवा कहानी ने पारंपरिक छायाओं से मुक्त होकर अपनी स्वतंत्र पहचान निर्मित की है। आज कथ्य के साथ-साथ कहने का नया सलीका भी स्पष्ट दिखाई देता है।
समाहार वक्तव्य में संतोष चौबे ने कहा कि वनमाली कथा सम्मान हिंदी कहानी के बहुआयामी विमर्श का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। उन्होंने तकनीक के अंधानुकरण से बचते हुए उसे मानवीय संवेदनाओं के साथ साहित्य में रूपांतरित करने पर बल दिया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में मुकेश वर्मा ने साहित्य को समग्र परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस अवसर पर टैगोर विश्व कला एवं संस्कृति केंद्र द्वारा संयोजित तथा आईसेक्ट पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित पुस्तकों ‘अनुनाद’ और ‘रागमाला’ का भी लोकार्पण किया गया।
फागुनी रंगों में रंगी सांस्कृतिक प्रस्तुति:
समारोह के समापन अवसर पर टैगोर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के विद्यार्थियों ने चेतन्य आठले और विक्रांत भट्ट के संयोजन में फागुनी रंगों से सराबोर गीतों की मनोहारी प्रस्तुति दी। संगीत और लोकधर्मी रंगों से सजी इस सांस्कृतिक संध्या ने पूरे आयोजन को उत्सवधर्मी और उल्लासपूर्ण बना दिया।
समापन:
वनमाली कथा सम्मान समारोह का तीसरा दिन यह संदेश देकर संपन्न हुआ कि साहित्य की असली शक्ति उसकी संवेदना और समय के साथ संवाद करने की क्षमता में निहित है। युवा कहानी के बदलते आयामों पर गंभीर विमर्श और रचनात्मक अभिव्यक्तियों ने इस आयोजन को साहित्यिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध और यादगार बना दिया।
