
काजल जाटव | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार, 2 जुलाई 2025 से आठ दिनों की दूसरी पंच-राष्ट्र यात्रा पर रवाना हुए हैं। इस यात्रा का मकसद ग्लोबल साउथ में भारत की भूमिका को मजबूत करना और वैश्विक बहुपक्षीय संस्थाओं में अपनी सक्रिय भागीदारी बनाए रखना है। आखिर क्या है रणनीति? क्या होंगे परिणाम?
यह यात्रा न केवल भारत की वैश्विक रणनीति को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह कई ऐतिहासिक अवसरों और कूटनीतिक सफलताओं का भी मंच बन सकती है। इस यात्रा के जरिए भारत की विदेश नीति, व्यापारिक संबंधों और रणनीतिक साझेदारियों को एक नया आयाम देने का एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ने जा रहा है।
यात्रा के प्रमुख पड़ाव
इस यात्रा में प्रधानमंत्री मोदी जिन पांच देशों का दौरा करेंगे, उनमें रूस, ऑस्ट्रिया, कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और सर्बिया शामिल हैं। हर एक देश के साथ भारत के संबंध अलग-अलग स्तर पर रहे हैं, और इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य इन संबंधों को और मजबूत बनाना है।
पंच राष्ट्र यात्रा- शुरू से अंत तक
- इस महत्वपूर्ण दौरे की शुरुआत अफ्रीकी देश घाना से होगी, जहां वे 2 से 3 जुलाई तक रुकेंगे।
- 3 और 4 जुलाई को प्रधानमंत्री त्रिनिदाद और टोबैगो का दौरा करेंगे। भारतवंशी समुदाय की बड़ी आबादी वाला यह देश भारत के लिए सांस्कृतिक रूप से विशेष महत्व रखता है। पीएम मोदी की यह यात्रा 1999 के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा होगी, जो भारतीय प्रवासी समुदाय से गहरे जुड़ाव को दर्शाती है।
- 4 और 5 जुलाई को पीएम मोदी अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में रहेंगे। दौरे का अंतिम चरण 9 जुलाई को नामीबिया में होगा, जहां भारत और नामीबिया के बीच वन्यजीव संरक्षण, ऊर्जा सहयोग और रक्षा क्षेत्र में साझेदारी को लेकर चर्चा होगी।
ब्राजील में पीएम मोदी BRICS (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) सम्मेलन में भाग लेंगे. सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, डिजिटल समावेशन, सतत विकास और वैश्विक दक्षिण के हितों की रक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी. रवाना होने से पहले पीएम मोदी ने कहा, “भारत उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग को मजबूत करने के लिए BRICS जैसे मंचों को बेहद महत्वपूर्ण मानता है. हम एक शांतिपूर्ण, समतामूलक, लोकतांत्रिक और संतुलित बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के लिए प्रयासरत हैं.”
क्या उद्देश्य हैं यात्रा के?
- रूस: भारत और रूस के बीच के ऐतिहासिक और सामरिक संबंध हमेशा से महत्वपूर्ण रहे हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, और विज्ञान-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में गहरा सहयोग है। पीएम मोदी की यह यात्रा उस समय हो रही है जब रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते पश्चिमी देशों से अलग-थलग पड़ गया है। ऐसे में भारत का यह दौरा एक संतुलनकारी भूमिका निभा सकता है। इस दौरान ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा उपकरणों की आपूर्ति, और ब्रिक्स जैसे वैश्विक मंचों पर साझेदारी पर चर्चा होगी।
- ऑस्ट्रिया: यह यात्रा किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की ऑस्ट्रिया की पहली यात्रा होगी। यह एक ऐतिहासिक क्षण है जो भारत और ऑस्ट्रिया के संबंधों में एक नया मोड़ ला सकता है। ऑस्ट्रिया विज्ञान, नवाचार और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में एक अग्रणी देश है। इस यात्रा के दौरान, दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग, व्यापार और शिक्षा के क्षेत्र में समझौतों की संभावना है।
- कजाकिस्तान: प्रधानमंत्री मोदी की कजाकिस्तान यात्रा का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा सहयोग को बढ़ाना और व्यापार व निवेश के नए अवसर तलाशना है, खासकर तेल, गैस और खनन क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करना।
- तुर्कमेनिस्तान: तुर्कमेनिस्तान यात्रा का प्रमुख उद्देश्य TAPI (तुर्कमेनिस्तान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान-इंडिया) गैस पाइपलाइन परियोजना को पुनर्जीवित करना और इसके क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियों को हल करना है।
- सर्बिया: सर्बिया भारत का पारंपरिक मित्र रहा है और दोनों देशों के बीच गैर-गठबंधन आंदोलन के दौर से ही संबंध रहे हैं। पीएम मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के नए अवसर खोल सकती है।
- रणनीतिक साझेदारी को सशक्त करना
- ऊर्जा, सुरक्षा और कनेक्टिविटी पर सहयोग बढ़ाना
- रक्षा, तकनीकी और शैक्षणिक क्षेत्रों में नए समझौते
- वैश्विक मंचों पर सहयोग और संतुलन की भूमिका निभाना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह यात्रा, जिसमें पांच देशों का दौरा शामिल है, एक बेहद महत्वपूर्ण राजनयिक कदम है। यह भारत की “वसुधैव-कुटुंबकम्” की सोच और वैश्विक नेतृत्व की भूमिका को बखूबी दर्शाता है। इस यात्रा के जरिए भारत अपनी विदेश नीति को और भी मजबूत करेगा और वैश्विक मंच पर अपनी सक्रियता को बढ़ाएगा। इससे न केवल द्विपक्षीय संबंधों में मजबूती आएगी, बल्कि भारत की ऊर्जा, रक्षा और आर्थिक हितों को भी नई दिशा मिलेगी।
