Muskan Garg: नया साल आते ही मोबाइल फोन पर शुभकामनाओं की बाढ़ आ जाती है। व्हाट्सऐप, फेसबुक और ईमेल पर आने वाले मैसेज खुशियां बांटते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक इन्हीं में से कई मैसेज साइबर ठगी का जाल भी हो सकते हैं। हाल के दिनों में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जहां एक साधारण सा “Happy New Year” मैसेज खोलते ही लोगों का बैंक अकाउंट खाली हो गया।
कैसे काम करता है यह साइबर फ्रॉड?
साइबर अपराधी अक्सर न्यू ईयर, त्योहार या किसी ऑफर के नाम पर लिंक भेजते हैं। जैसे ही यूजर उस लिंक पर क्लिक करता है:
• मोबाइल में मैलवेयर इंस्टॉल हो सकता है।
• ओटीपी, बैंक डिटेल्स या पासवर्ड चोरी हो सकते हैं।
• फोन का रिमोट एक्सेस अपराधियों के हाथ में चला जाता है।
कई मामलों में यह लिंक देखने में बिल्कुल सामान्य लगता है, जैसे कोई वीडियो, ग्रीटिंग कार्ड या फोटो हो।
फिशिंग और ऑनलाइन स्कैम का बढ़ता खतरा:
सिर्फ व्हाट्सऐप ही नहीं, ईमेल और सोशल मीडिया पर भी फिशिंग तेजी से बढ़ रही है। नकली बैंक मैसेज, केवाईसी अपडेट के नाम पर कॉल, या लॉटरी जीतने के झूठे दावे ये सभी डिजिटल फ्रॉड के आम तरीके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जल्दबाजी और जानकारी की कमी लोगों को ठगों का आसान शिकार बना देती है।
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर भी फोकस:
डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा बन चुकी है। इसी को ध्यान में रखते हुए यूके में Online Safety Act लागू किया गया है। इसका उद्देश्य बच्चों को:
• हानिकारक कंटेंट
• ऑनलाइन शोषण और
• सोशल मीडिया के दुष्प्रभावसे बचाना है।
यह कानून डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को ज्यादा जिम्मेदार बनाता है और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है और भारत में बढ़ते साइबर अपराध भारत में भी ऐसा कोई साइबर कानून बनाने के लिए प्रेरित करते है।
कैसे रहें सुरक्षित? विशेषज्ञों की सलाह:
• अनजान लिंक या फाइल पर क्लिक न करें।
• ओटीपी, पासवर्ड किसी से साझा न करें।
• फोन में लेटेस्ट सिक्योरिटी अपडेट रखें।
• दो-स्तरीय प्रमाणीकरण (2FA) का उपयोग करें।
• बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें।
डिजिटल युग में सुविधा के साथ खतरे भी बढ़े हैं। एक छोटी सी लापरवाही बड़ा नुकसान कर सकती है। इसलिए जरूरी है कि हम ऑनलाइन सतर्कता को अपनी आदत बनाएं। याद रखें, हर मैसेज शुभकामना नहीं, कभी-कभी वह एक साइबर जाल भी हो सकता है।
