Muskan Garg: डिजिटल युग में वीडियो देखतें ही तुरंत सच मान लेना अब आसान नहीं रहा है। डीपफेक तकनीक ने असली और नकली के बीच की रेखा को इतना धुंधला कर दिया है कि कोई भी व्यक्ति मिनटों में किसी दूसरे के चेहरे और आवाज का उपयोग करके फर्जी वीडियो तैयार कर सकता है। ऐसे में जागरूक रहना और सही कंटेंट की पहचान करने के तरीके जानना बेहद जरूरी हो गया है। साथ ही, भारत में इस तरह की गतिविधियों पर कानूनी कार्यवाही के प्रावधान भी मौजूद हैं। आइए जानें कैसे नकली वीडियो पहचानें और कानून इससे आपकी सुरक्षा कैसे करता है।
कैसे पहचानें डीपफेक वीडियो कंटेंट?
1. चेहरे और होंठों की मूवमेंट देखें: अक्सर डीपफेक में होंठों का चलना और आवाज का तालमेल पूरी तरह सही नहीं होता है।
2. आँखों की झपकी पर ध्यान दें: कई डीपफेक वीडियो में पलक झपकने का रेट असामान्य होता है कभी बहुत कम या कभी बहुत ज्यादा।
3. चेहरे की लाइटिंग असमान: असली वीडियो में चेहरे पर रोशनी प्राकृतिक होती है, जबकि डीपफेक में छाया और लाइटिंग असंतुलित लग सकती है।
4. ऑडियो और टोन का मिलान करें: यदि आवाज परिचित है लेकिन टोन अस्वाभाविक लगे, तो शक करना चाहिए।
5. फ्रेम रुकना या पिक्सल फटना: वीडियो को स्लो मोशन में चलाएं। विकृति दिखे या चेहरे का हिस्सा ग्लिच हो तो संभावना है कि आपके द्वारा देखा जा रहा वीडियो या कंटेंट नकली हो सकता है।
6. रिवर्स सर्च करें: गूगल रिवर्स इमेज सर्च या वीडियो फ्रेम कैप्चर करके खोजने से सच्चाई सामने आ सकती है।
भारत में डीपफेक पर कानून क्या कहता है?
हालाँकि भारत में अभी डीपफेक के लिए अलग से विशिष्ट कानून नहीं बनाया गया है, लेकिन कई धाराओं के तहत कार्रवाई संभव है:
1.आईटी एक्ट 2000 की धारा 66D: ऑनलाइन धोखाधड़ी, पहचान की नकल करने पर सजा और जुर्माना।
2. आईटी एक्ट धारा 67: अश्लील या आपत्तिजनक कंटेंट प्रसारित करने पर दंड।
3. भारतीय दंड संहिता (IPC) धारा 469, 500: व्यक्ति की छवि खराब करने या मानहानि करने पर केस दर्ज हो सकता है।
4. महिलाओं पर आपत्तिजनक डीपफेक कंटेंट: साइबर सेल में शिकायत पर त्वरित कार्रवाई संभव।
सरकार डीपफेक रोकने हेतु AI मॉनिटरिंग टूल्स विकसित कर रही है और भविष्य में खास डीपफेक कानून बनने की भी पूरी संभावनाएं है।
डीपफेक तकनीक लाभकारी भी है, पर इसका दुरुपयोग होने पर यह हानिकारक भी साबित हो सकती है। इसलिए सतर्क रहें, तुरंत विश्वास न करें और तथ्य जांचें। फर्जी वीडियो मिलने पर शेयर करने के बजाय रिपोर्ट करें, क्योंकि डिजिटल सुरक्षा भी हम सबकी जिम्मेदारी है।
