व्हाट्सएप ग्रुप और नकली वेबसाइट के जरिए रचा गया जाल
विशाखापट्टनम में एक रिटायर्ड प्राध्यापक के साथ बड़े पैमाने पर साइबर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, पांडिचेरी के जेआईपीएमईआर (JIPMER) के पूर्व निदेशक प्रोफेसर डॉ. एम. बैटमैनबेन मौनिस्सामी, जो वर्तमान में गिटम यूनिवर्सिटी परिसर, विशाखापट्टनम में निवास कर रहे हैं, को निवेश के नाम पर लगभग 2 करोड़ रुपये का चूना लगाया गया।
ठगी की शुरुआत व्हाट्सएप ग्रुप से
प्रोफेसर को अप्रैल 2025 में “H-10 नुवामा हेल्थ ग्रुप” नामक व्हाट्सएप ग्रुप में शामिल होने का संदेश मिला। यह ग्रुप निवेश से जुड़े मार्गदर्शन और नुवामा फंड्स (पूर्व में एडेलवाइस फंड्स) में निवेश के नाम पर बनाया गया था। चूंकि पीड़ित के पास पहले से एडेलवाइस फंड्स में निवेश था, उन्होंने इस ग्रुप को वास्तविक मानकर इसमें शामिल हो गए।
इसके बाद उन्हें एक नकली वेबसाइट (https://www.nuvamawealthc.com/) पर साइन अप करने के लिए कहा गया। ग्रुप से जुड़ी एक महिला ठग, खुद को नुवामा फंड्स की प्रतिनिधि बताते हुए, प्रोफेसर से लगातार संपर्क में रही।
शुरुआत में भरोसा जीतने की कोशिश
सबसे पहले प्रोफेसर ने 10,000 रुपये का निवेश किया और जब उन्हें 13,000 रुपये वापस मिले, तो उन्हें यह निवेश असली लगा। इसी भरोसे में उन्होंने 19 अप्रैल से 27 मई 2025 के बीच कुल 1.92 करोड़ रुपये का निवेश कर दिया।
वर्चुअल खाते में उनकी निवेश राशि 35 करोड़ रुपये दिखाई गई। जब उन्होंने 5 करोड़ रुपये निकालने की कोशिश की तो उन्हें “कमीशन” भरने के लिए कहा गया।
कमीशन के नाम पर लाखों की वसूली
ठगों ने उनसे पहले 32 लाख रुपये बतौर कमीशन मांगे, जिसे बाद में घटाकर 25% कर दिया गया। इस पर प्रोफेसर ने 7.90 लाख रुपये का भुगतान किया। लेकिन फिर भी उन्हें कोई रकम वापस नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने नुवामा फंड्स के तथाकथित “बॉस” अशिष केहैर से भी संपर्क किया, मगर कोई समाधान नहीं निकला। अंततः उन्हें समझ आ गया कि वे साइबर धोखाधड़ी के शिकार हो चुके हैं।
मामला दर्ज, जांच जारी
डॉ. मौनिस्सामी ने 18 जून 2025 को सीबीआई एसीबी (Anti-Corruption Bureau), विशाखापट्टनम में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS 2023) की विभिन्न धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 66C और 66D के तहत मामला दर्ज किया गया है।
यह मामला साइबर अपराधियों द्वारा तकनीकी साधनों और झूठे भरोसे का इस्तेमाल कर वरिष्ठ नागरिकों और निवेशकों को ठगने का गंभीर उदाहरण है।
स्रोत: प्राथमिकी (FIR) संख्या RC0362025A0009, सीबीआई एसीबी, विशाखापट्टनम (25 जून 2025)
