Baljinder Kaur: सरकार ने लेबर नियमों में एक बड़ा बदलाव किया है, जिससे कर्मचारियों को अब ज्यादा सुरक्षा और फायदे मिलेंगे। नए श्रम कानून में यह नियम शामिल किया गया है कि जो कर्मचारी फिक्स्ड‑टर्म यानी निश्चित समय के लिए काम कर रहे हैं, वे अब सिर्फ एक साल की नौकरी पूरी करने के बाद भी ग्रेच्युटी पाने के हकदार होंगे।
पहले इस सुविधा का लाभ पाने के लिए कम से कम पांच साल तक काम करना जरूरी था। नए नियम से छोटे समय के कर्मचारियों को भी लंबे समय तक काम किए बिना यह लाभ मिलेगा।
ग्रेच्युटी क्या है ?
ग्रेच्युटी किसी भी कंपनी की तरफ से अपने कर्मचारियों को एक तरह से उनके काम के बदले दिया जाने वाला तोहफा होता है। यह अभी तक एक संस्थान में ही 5 सालों तक लगातार नौकरी करने वाले पर्मानेंट कर्मचारियों को दिया जाता था, लेकिन अब इसमें बदलाव के बाद 1 साल तक सर्विस करने वाले कर्मचारियों को भी जोड़ दिया गया है।
ग्रेच्युटी के नये नियम
अब फिक्स्ड‑टर्म पर काम करने वाले कर्मचारी सिर्फ 1 साल नौकरी पूरी करने पर ग्रेच्युटी के हकदार होंगे।
पहले यह सुविधा पाने के लिए कम से कम 5 साल काम करना जरूरी था।
छोटे समय के कर्मचारियों को भी वित्तीय सुरक्षा मिलेगी।
नौकरी कम समय में छोड़ने पर भी ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा।
इसे ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है क्योंकि इससे कामगारों की सुरक्षा बढ़ेगी और आर्थिक सुरक्षा बढ़ाने का एक सकारात्मक कदम है।
फिक्स्ड‑टर्म कर्मचारियों को लंबे समय तक इंतजार किए बिना लाभ देना।
कुछ चुनौतियाँ
कंपनियों के लिए यह खर्च‑बढ़त का कारण बन सकता है क्योंकि उन्हें अब कम सेवा अवधि वाले कर्मचारियों को भी ग्रेच्युटी देना पड़ेगी।
कुछ फर्में यही कह सकती हैं कि छोटे प्रोजेक्ट‑काम में यह लाभ देना उनके लिए आर्थिक बोझ है, जिससे नौकरी की लागत बढ़ सकती है।
सरकार द्वारा ग्रेच्युटी नियम में यह बड़ा बदलाव कामगारों के लिए एक बहुत बड़ी राहत है। यह फैसला लेबर कोड सुधारों की दिशा में एक मजबूत कदम है, जो कर्मचारियों को सिर्फ छोटी अवधि की नौकरी में भी दीर्घकालिक फायदे दिलाता है। यदि यह अपने लक्ष्य पर सही तरीके से लागू होता है, तो यह लाखों कर्मचारियों विशेष रूप से कॉन्ट्रैक्ट और फिक्स्ड‑टर्म कर्मचारियों की आर्थिक मजबूती और नौकरी की सुरक्षा को बढ़ा सकता है।
