रिपोर्ट, काजल जाटव 

चंद्रमा सिर्फ पृथ्वी का एक प्राकृतिक उपग्रह ही नहीं है, बल्कि उसकी गुरुत्वाकर्षण ताकत हमारी धरती की अनेक प्रक्रियाओं को प्रभावित करती है — जैसे कि ज्वार-भाटे और हमारी पृथ्वी की घुमाव की रफ्तार। 2025 में, 9 जुलाई, 22 जुलाई, और 5 अगस्त जैसी तारीखें खास होने वाली हैं, क्योंकि इन दिनो पर चंद्रमा पृथ्वी से सबसे ज्यादा दूर रहेगा। इस स्थिति को ‘लूनर डिक्लिनेशन मैक्सिमा’ कहा जाता है, जो धरती की धुरी और उसकी घूमने की रफ्तार पर थोड़ा अलग असर डाल सकता है।

क्या है ‘लूनर डिक्लिनेशन’?

डिक्लिनेशन यानी किसी खगोलीय पिंड का अंतरिक्ष में अपनी भूमि के लिहाज से कोणीय दूरी। जब चाँद अपने सबसे ज्यादा उत्तर या दक्षिण की तरफ पहुंच जाता है, तो उसे ‘लूनर डिक्लिनेशन मैक्सिमा’ कहा जाता है। ये मौके हर महीने में दो बार आते हैं, लेकिन कुछ खास तारीखों पर, जैसे कि 2025 में ये तीन तारीखें हैं, चाँद अपनी सबसे ज्यादा स्थिति में होता है। — 

पृथ्वी की घूर्णन गति पर प्रभाव

जब चाँद जमीन से बहुत दूर होता है, तो उसका गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी की सतह पर अलग-अलग तरह से काम करता है। इससे पृथ्वी की स्पिनिंग थोड़ी धीमी या तेज हो सकती है, लेकिन ये बदलाव बहुत ही सूक्ष्म होते हैं — यानी कि मिलिसेकंड स्तर पर। हालांकि, इन छोटे-छोटे बदलावों का लम्बे समय में असर हो सकता है, जैसे कि मौसम, समुद्री धाराएँ और यहां तक कि भूकंप की गतिविधियों पर भी।

समुद्री ज्वारों पर असर

इन खास तारीखों पर ज्वार-भाटे की तीव्रता थोड़ी अलग हो सकती है। चाँद के गुरुत्वाकर्षण में आ रहे बदलाव की वजह से कुछ जगहों पर ज्वार ज्यादा तेज़ हो सकते हैं, तो कहीं-कहीं कम और फैलाव ज्यादा महसूस हो सकता है। जो लोग तटीय इलाके में रहते हैं, उन्हें इन दिनों थोड़ी सतर्कता और सावधानी बरतनी पड़ सकती है।

खगोलवेत्ता और भूगर्भशास्त्रियों के लिए ये समय बड़ा बढ़िया है। इन घटनाओं से पृथ्वी और चाँद के जटिल संबंधों को और अच्छे से समझ सकते हैं। इससे मौसम और जलवायु के पूर्वानुमान भी और सही हो सकते हैं, और पृथ्वी के घूमने-फिरने के मामूली बदलाव भी साफ़ पता चल सकते हैं।

9 और 22 जुलाई, और 5 अगस्त 2025 को आ रहे ये खगोलीय नज़ारे दिखाते हैं कि ये एक महत्वपूर्ण कारक है जो पृथ्वी के जीवन और वातावरण को प्रभावित करता है।

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