गीत : देश-दुनिया में बढ़ते कचरे की समस्या से निपटने के लिए मध्य प्रदेश में भी कचरे की रिसाइकिलिंग पर जोर दिया जा रहा है। राजधानी भोपाल में कचरे के निष्पादन के लिए एक बड़ी पहल की गई है। यहां पीपीपी मॉडल पर एक अत्याधुनिक प्लांट तैयार किया गया है, जिसमें बेकार कपड़ों के कचरे को रिसायकल किया जा रहा है। इससे हाई क्लास कॉटन और फाइबर बनाया जा रहा है।एक अत्याधुनिक प्लांट में बेकार कपड़ों को रिसायकल कर उपयोगी उत्पाद जैसे सॉफ्ट टॉयज, किक बैग्स और क्रिकेट पैड्स बनाए जा रहे हैं। यह प्लांट पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी मॉडल) के तहत काम कर रहा है

नगरीय विकास विभाग की पहल : नगरीय विकास एवं आवास विभाग शहरों में बढ़ते कचरे के उचित निष्पादन के लिए निकायों को लगातार प्रोत्साहित कर रहा है। प्रदेश के अनेक नगरीय निकायों ने इस दिशा में पहल भी की है, जिसके बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं। भोपाल नगर निगम ने कपड़े के रूप में अपशिष्ट प्रबंधन के लिए प्लांट बनाया है।

(टीआरएफ) सेंटर : पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी मॉडल) के अंतर्गत टेक्सटाइल रिकवरी फेसिलिटी (टीआरएफ) सेंटर स्थापित किया गया है। वस्त्र अपशिष्ट प्रबंधन और पुनर्चक्रण (रिसायकल) को बढ़ावा देने के लिए यह पहल एक महत्वपूर्ण कदम है। इस प्लांट में कपड़ों के कचरे को इकट्ठा कर उन्हें रिसायकल किया जाता है और इससे नए उत्पाद बनाए जाते हैं।

आर्थिक लाभ : करीब 2 करोड़ रुपये से तैयार इस अत्याधुनिक प्लांट से निगम को प्रति माह 22 हजार रुपये की रायल्टी प्राप्त होगी। इससे न केवल कचरे की समस्या का समाधान होगा, बल्कि निगम को आर्थिक लाभ भी होगा।

भविष्य की संभावनाएं : इस पहल से भोपाल शहर को स्वच्छ और हरा-भरा बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही, यह पहल अन्य शहरों के लिए भी एक मॉडल के रूप में काम कर सकती है। इससे कचरे की समस्या का समाधान होगा और पर्यावरण को भी बचाया जा सकेगा।

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