रिपोर्ट, काजल जाटव: भारतीय नौसेना ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अपने बेड़े में दो नए, अत्याधुनिक बहु-मिशन स्टील्थ फ्रिगेट्स, आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस हिमगिरि, को शामिल किया है। पूर्वी नौसेना कमान में आयोजित एक भव्य समारोह में पहली बार ऐसा मौका आया कि दो अलग-अलग भारतीय शिपयार्ड से बने ये जहाज एक साथ कमीशन किए गए। ये दोनों जहाज न सिर्फ हमारी नौसेना की ताकत बढ़ाएंगे, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को भी आगे ले जाएंगे।

इस कमीशनिंग को “आत्मनिर्भर भारत के सपने की प्राप्ति की एक तस्वीर” बताते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि यह “हमारी दूरदृष्टि और प्रतिबद्धता का भी प्रमाण है।”

पहली बार, दो फ्रिगेट्स एक साथ कमीशन

यही पहली बार है जब किसी भी समय दो नए जहाज को एक साथ कमीशन किया गया है। इससे पहले, नौसेना में नए जहाजों को अलग-अलग मौकों पर जोड़ा जाता था। लेकिन इस बार, परंपरागत तरीके को तोड़ते हुए, दोनों जहाज एक साथ शामिल किए गए।

आईएनएस उदयगिरि का निर्माण मुंबई के मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) में हुआ है, जबकि आईएनएस हिमगिरि कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) ने बनाया है। दोनों ही जहाज घरेलू तकनीक और डिजाइन पर आधारित हैं और भारत की ‘प्रोजेक्ट 17ए’ योजना का हिस्सा हैं।

प्रोजेक्ट 17 ए: भारत की स्वदेशी क्षमता का परिचायक

प्रोजेक्ट 17ए भारत की बहुत महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके तहत सात उन्नत फ्रिगेट्स बनाए जा रहे हैं। ये जहाज न सिर्फ स्टील्थ तकनीक से लैस हैं, बल्कि मल्टी-रोल मिशन भी अंजाम दे सकते हैं। इनमें मिसाइलें, टॉरपीडो, बेहतर रडार और सेंसर लगे हैं, जो सतह, हवा और पानी के नीचे की हर गतिविधि पर नजर रखते हैं।

इन जहाजों का 75% से ज्यादा हिस्सा स्वदेशी है, जो भारत की रक्षा उद्योग की क्षमता को दिखाता है।

आईएनएस उदयगिरि और हिमगिरि की खासियतें

  • स्टील्थ तकनीक: ये जहाज दुश्मनों की रडार से लगभग दिखाई नहीं देते।
  • मल्टी-रोल क्षमताएँ: ये सब तरह के मिशन कर सकते हैं, जैसे एक्स्ट्रा सुरक्षा, सतह और हवा से हमला।
  • आधुनिक हथियार: इनके पास ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल, नई तोप और टॉरपीडो सिस्टम हैं।
  • हेलिकॉप्टर संचालन: ये दोनों जहाज ‘MH-60R सीहॉक’ जैसे हेलिकॉप्टर को भी ऑपरेट कर सकते हैं।
  • नेटवर्क आधारित युद्ध प्रणाली: ये जहाज उपग्रह और नेटवर्क से जुड़े हैं, जिससे बहुत तेज और सटीक हमला संभव है।

भारत की समुद्री सुरक्षा का बड़ा कदम

भारत का भौगोलिक स्थान हिंद महासागर के ठीक बीच में है, इसलिए यहां की सुरक्षा बहुत जरूरी है। चीन लगातार इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है, तो पाकिस्तान के साथ मिलकर नौसेना ताकत भी बढ़ रही है। ऐसे में, आईएनएस उदयगिरि और हिमगिरि जैसे जहाज हमारी नौसेना को ताकतवर बनाएंगे और हिंद महासागर में भारत की स्थिति को और मजबूत करेंगे।

‘मेक इन इंडिया’ का एक बड़ा उदाहरण

इन दोनों जहाजों का निर्माण भारत के दो अलग-अलग शिपयार्ड में हुआ है, जो इस बात का संकेत है कि देश अब बड़े पैमाने पर युद्धपोत बनाने में आत्मनिर्भर हो रहा है। पहले हम विदेशी तकनीक पर निर्भर रहते थे, लेकिन अब आप अपने ही घर में ही सबसे आधुनिक युद्धपोत बना रहे हैं।

भविष्य का रास्ता

भारतीय नौसेना का लक्ष्य है कि साल 2030 तक, उनके पास 170 से ज्यादा युद्धपोत हों। ये नावें न सिर्फ युद्ध के लिए बल्कि मानवीय सहायता, समुद्री आपदा राहत और समुद्री डकैती रोकने जैसी चुनौतियों में भी मदद करेंगी। आईएनएस उदयगिरि और हिमगिरि इसी दिशा में एक कदम हैं।

आईएनएस उदयगिरि और हिमगिरि का एक साथ जलावतरण भारतीय नौसेना की ताकत में ऐतिहासिक बढ़ोतरी है। यह उपलब्धि न सिर्फ हमारी सैन्य क्षमताओं का विस्तार है, बल्कि यह भारत की तकनीक और उद्योग की आत्मनिर्भरता का भी प्रतीक है। इन आधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट्स के साथ, भारतीय नौसेना अब और अधिक मजबूत, सक्षम और विश्वसनीय बनकर उभरेगी।

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