Muskan Garg: हिंदी सिनेमा हमेशा से समाज के ज्वलंत मुद्दों को बड़े पर्दे पर उतारता रहा है। मुस्लिम समाज में ‘तीन तलाक’ जैसे संवेदनशील विषय से लेकर महिलाओं के अधिकारों तक, कई फिल्में बनीं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जहां हाल के वर्षों में बनी ‘हक’ जैसी फिल्म दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में नाकाम रही, वहीं 1982 में रिलीज हुई फिल्म ‘निकाह’ ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया था। आखिर इन दोनों फिल्मों के नतीजों में इतना बड़ा फर्क क्यों रहा?
‘हक’: मुद्दा बड़ा, लेकिन पकड़ कमजोर:
‘हक’ फिल्म का विषय बेहद गंभीर और सामाजिक रूप से अहम था। फिल्म में तीन तलाक की कुप्रथा, महिला की बेबसी और उसके कानूनी अधिकारों को दिखाने की कोशिश की गई। हालांकि, फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी कहानी कहने की शैली रही। फिल्म ज्यादा उपदेशात्मक नजर आई, जिससे दर्शक भावनात्मक रूप से उससे जुड़ नहीं पाए। न ही इसके किरदार इतने मजबूत थे कि लोग उनकी पीड़ा को महसूस कर सकें। इसके अलावा सीमित प्रमोशन और कम स्टार पावर ने भी फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर असर डाला।
80 के दशक की ‘निकाह’: सामाजिक संदेश के साथ मनोरंजन:
बी.आर. चोपड़ा के निर्देशन में बनी ‘निकाह’ एक सामाजिक विषय पर आधारित होने के बावजूद पूरा मनोरंजन पैकेज थी। फिल्म में तलाक, महिला सम्मान और रिश्तों की जटिलताओं को बेहद संवेदनशील और संतुलित तरीके से पेश किया गया था। राज बब्बर, सलमा आगा और दीपक पराशर जैसे कलाकारों की दमदार अदाकारी ने कहानी को जीवंत बना दिया। खास बात यह रही कि फिल्म किसी पर उंगली उठाने के बजाय सवाल खड़े करती है और दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है।
संगीत बना सबसे बड़ा हथियार:
‘निकाह’ की सफलता में इसके संगीत का भी बड़ा योगदान रहा। “दिल के अरमां आँसुओं में बह गए” जैसे गाने आज भी लोगों की जुबान पर हैं। उस दौर में संगीत फिल्म की आत्मा होता था, जिसने दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचा। वहीं ‘हक’ जैसी फिल्मों में संगीत वह जादू नहीं दिखा सका।
दौर का फर्क और दर्शकों की सोच:
80 के दशक में सिनेमा समाज में संवाद का सबसे मजबूत माध्यम था। उस समय दर्शक सामाजिक मुद्दों पर बनी फिल्मों को गंभीरता से देखते थे। आज ओटीटी और सोशल मीडिया के दौर में दर्शकों की प्राथमिकताएं बदल चुकी हैं। लोग तेज़ रफ्तार, थ्रिल और एंटरटेनमेंट चाहते हैं।
‘हक’ और ‘निकाह’ दोनों ही फिल्मों का मकसद समाज को आईना दिखाना था, लेकिन प्रस्तुति और दौर के फर्क ने उनके नतीजे तय किए। ‘निकाह’ जहां मनोरंजन और संदेश का बेहतरीन संतुलन बनाकर ब्लॉकबस्टर बनी, वहीं ‘हक’ सिर्फ मुद्दे के भरोसे दर्शकों का दिल जीतने में नाकाम रही।
