Muskan Garg: फिल्म ‘धुरंधर’ को लेकर दर्शकों में काफी खास उत्साह देखने को मिल रहा है। दमदार कहानी, गंभीर ट्रीटमेंट और सशक्त किरदारों के बीच अब इस फिल्म से जुड़ा एक बड़ा खुलासा सामने आया है। फिल्म के चर्चित गाने ‘शरारत’ को लेकर कोरियोग्राफर विजय गांगुली ने ऐसा राज खोला है, जिसने फिल्म इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है।
‘शरारत’ के लिए तमन्ना भाटिया थीं पहली पसंद:
विजय गांगुली ने एक इंटरव्यू में बताया कि गाने ‘शरारत’ के लिए मेकर्स की पहली पसंद कोई और नहीं बल्कि तमन्ना भाटिया थीं। तमन्ना की स्क्रीन प्रेजेंस, उनका डांस स्टाइल और ग्लैमर इस गाने के मूड से पूरी तरह मेल खाता था और शुरुआती चर्चा में उनका नाम लगभग फाइनल माना जा चुका था।
आदित्य धर ने क्यों किया तमन्ना को रिजेक्ट?
हालांकि, फिल्म के निर्देशक आदित्य धर ने इस फैसले पर ब्रेक लगा दिया। विजय गांगुली के मुताबिक आदित्य धर का मानना था कि अगर तमन्ना भाटिया जैसी बड़ी और लोकप्रिय स्टार को गाने में लिया जाता, तो दर्शकों का ध्यान कहानी और किरदारों से हटकर सिर्फ गेस्ट अपीयरेंस पर चला जाता। उन्होंने साफ कहा, “यह गाना फिल्म की नैरेटिव फ्लो का हिस्सा है, कोई स्पेशल आइटम नंबर नहीं। तमन्ना जैसी स्टार इसमें होतीं तो फोकस बंट जाता।”
कहानी को प्राथमिकता, स्टारडम को नहीं:
आदित्य धर का यह फैसला उनकी सोच को दर्शाता है, जहां कहानी को स्टार पावर से ऊपर रखा गया। ‘धुरंधर’ एक गंभीर और रियलिस्टिक टोन वाली फिल्म बताई जा रही है, जिसमें हर सीन का उद्देश्य कहानी को आगे बढ़ाना है। ऐसे में किसी बड़े स्टार की मौजूदगी गाने को हाइलाइट तो बना देती, लेकिन फिल्म के मूल भाव से समझौता हो सकता था।
‘शरारत’ गाने की खासियत:
विजय गांगुली ने यह भी बताया कि ‘शरारत’ को बेहद सादगी और कैरेक्टर-ड्रिवन अप्रोच के साथ कोरियोग्राफ किया गया है। इसमें ग्लैमर से ज्यादा भावनाओं और माहौल पर जोर दिया गया है, ताकि यह गाना कहानी का स्वाभाविक हिस्सा लगे।
फैन्स की मिली-जुली प्रतिक्रिया:
इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर फैन्स दो हिस्सों में बंट गए हैं। एक वर्ग का मानना है कि तमन्ना भाटिया होतीं तो गाना और बड़ा बन जाता, वहीं दूसरा वर्ग आदित्य धर के फैसले की तारीफ कर रहा है कि उन्होंने कंटेंट को प्राथमिकता दी।
‘धुरंधर’ और उसके गाने ‘शरारत’ से जुड़ा यह खुलासा साबित करता है कि हर बड़ी फिल्म के पीछे कई ऐसे फैसले होते हैं, जो दर्शकों को पर्दे पर कभी दिखाई नहीं देते। आदित्य धर का यह कदम एक बार फिर दिखाता है कि जब कहानी मजबूत हो, तो स्टारडम से बड़ा कुछ नहीं होता।
