Suvangi Pradhan:गीतकार और लेखक मनोज मुंतशिर ने हाल ही में मशहूर संगीतकार ए.आर. रहमान के एक बयान पर असहमति जताई है। रहमान ने एक इंटरव्यू में कहा था कि बॉलीवुड में अब बड़े और यादगार गानों की कमी हो गई है और फिल्म इंडस्ट्री पहले जैसी नहीं रही। इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मनोज मुंतशिर ने कहा कि बीते आठ सालों में हिंदी सिनेमा ने कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मनोज मुंतशिर ने कहा, यह कहना कि बॉलीवुड अब पहले जैसा नहीं रहा, पूरी तस्वीर नहीं दिखाता
पिछले आठ वर्षों में पठान और जवान जैसी फिल्में ₹500 करोड़ क्लब में पहुंचीं, जो हिंदी सिनेमा की ताकत और दर्शकों के भरोसे को साबित करती हैं। उन्होंने आगे कहा कि दर्शकों की पसंद जरूर बदली है, लेकिन कंटेंट और म्यूजिक की गुणवत्ता अब भी दमदार है।
मुंतशिर ने यह भी जोड़ा कि हर दौर की अपनी चुनौतियां और संभावनाएं होती हैं
उन्होंने कहा, आज के दर्शक ज्यादा जागरूक हैं, उनके पास विकल्प ज्यादा हैं, इसलिए फिल्मकारों और संगीतकारों को भी नए प्रयोग करने पड़ रहे हैं। इसे गिरावट कहना सही नहीं, बल्कि यह बदलाव और विकास का संकेत है। गीतकार ने यह स्पष्ट किया कि वह रहमान की कला और योगदान का बेहद सम्मान करते हैं, लेकिन इस मुद्दे पर उनकी राय अलग है।
मनोज मुंतशिर के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है
कुछ लोग रहमान के विचारों से सहमत नजर आए, तो कई ने मुंतशिर के तर्क का समर्थन किया। फिल्म समीक्षकों का मानना है कि यह बहस दरअसल बदलते दौर में सिनेमा और संगीत की भूमिका पर व्यापक चर्चा का हिस्सा है। यह विवाद हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की वर्तमान स्थिति और भविष्य की दिशा को लेकर एक नई बहस को जन्म दे रहा है, जिसमें रचनात्मकता, व्यवसायिक सफलता और दर्शकों की बदलती पसंद जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से सामने आ रहे हैं।

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