Suvangi Pradhan: गोवा में चल रहे 55वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया में बॉलीवुड एक्टर अनुपम खेर ने अपनी विशेष मास्टरक्लास के दौरान जीवन, सफलता और संघर्ष पर बेबाकी से अपने विचार साझा किए। सिनेमा के छात्रों, युवा कलाकारों और फिल्मप्रेमियों से भरे ऑडिटोरियम में खेर ने कहा कि उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी सीख है कभी हार मत मानो।
एक समय ऐसा भी था जब उन्हें लगातार असफलताओं का सामना करना पड़ा था
अनुपम खेर ने अपने शुरुआती संघर्षों को याद करते हुए बताया कि, दिल्ली से मुंबई आया था तो जेब में पैसे कम थे, सपने बड़े थे और रास्ते कठिन थे। लेकिन मैंने ठान लिया था कि पीछे मुड़कर नहीं देखना है। खेर ने यह भी बताया कि उनके करियर का मोड़ फिल्म सारांश से आया, जिसने यह साबित कर दिया कि मेहनत और धैर्य का कोई विकल्प नहीं होता।
मास्टरक्लास के दौरान खेर ने अभिनय प्रक्रिया पर भी विस्तार से बात की
उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि कलाकार के लिए सबसे जरूरी है ईमानदार अवलोकन, अगर आप अपने आसपास की दुनिया को ध्यान से देखेंगे, लोगों को समझेंगे, उनकी खुशियाँ, डर और संघर्षों को महसूस करेंगे, तभी आप एक सच्चे अभिनेता बन पाएंगे। फिल्म इंडस्ट्री में बढ़ते अवसरों का जिक्र करते हुए उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म, छोटे बजट की फिल्मों और क्षेत्रीय सिनेमा के उभार को सकारात्मक बदलाव बताया। आज के कलाकार के पास एक्सप्रेशन के अनगिनत माध्यम हैं। यह समय रचनात्मकता का स्वर्णकाल है, बस जरूरत है लगातार सीखते रहने की, उन्होंने कहा।
यह मास्टरक्लास फिल्म छात्रों के लिए प्रेरणादायक साबित हुई
कार्यक्रम के अंत में दर्शकों ने खेर से कई सवाल पूछे करियर चुनने की उलझन, आत्मविश्वास की कमी और असफलता के डर को लेकर। सभी सवालों के जवाब में खेर का संदेश एक ही था हार मत मानो। IFFI में अनुपम खेर की यह मास्टरक्लास न सिर्फ फिल्म छात्रों के लिए प्रेरणादायक साबित हुई, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए भी जो जीवन में सपनों को साकार करना चाहता है।

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