Suvangi Pradhan: बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनोट अक्सर अपने बेबाक बयानों की वजह से चर्चा में रहती हैं। हाल ही में उन्होंने बेटी और बेटे के बीच होने वाले भेदभाव पर खुलकर बात की। कंगना का कहना है कि एशियाई समाजों में अभी भी बेटे को लेकर एक अलग ही मानसिकता बनी हुई है, और यह सोच फिल्म इंडस्ट्री जैसे आधुनिक माने जाने वाले क्षेत्रों में भी साफ दिखाई देती है।

कंगना ने कहा, कई परिवारों में आज भी बच्चे के जन्म से पहले ही यह उम्मीद कर ली जाती है कि बेटा ही होगा

उन्होंने बताया कि यह केवल छोटे कस्बों या ग्रामीण इलाकों की बात नहीं है, बल्कि बड़े शहरों, पढ़े-लिखे परिवारों और यहां तक कि बॉलीवुड के कई घरों में भी ऐसा ही माहौल दिख जाता है। उनके अनुसार, “लोगों को लगता है कि बेटा परिवार का नाम रोशन करेगा, जिम्मेदारी उठाएगा, जबकि बेटियों को आज भी बोझ मानने की मानसिकता खत्म नहीं हो पाई है।”

कंगना ने कहा कि, बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और परिवार का सम्मान बढ़ाने में किसी भी तरह पीछे नहीं हैं

उन्होंने बताया कि वे खुद ऐसे माहौल से आई हैं जहाँ बेटियों को बराबरी दी जाती थी, लेकिन इंडस्ट्री में आने के बाद उन्हें कई बार इस भेदभाव को बेहद करीब से देखने और समझने का मौका मिला। इंडस्ट्री के भीतर मौजूद इस मानसिकता पर बोलते हुए कंगना ने कहा कि कई बार बड़े-बड़े परिवारों में भी बेटी के जन्म पर उतनी खुशी नहीं मनाई जाती, जितनी बेटे के जन्म पर होती है। उन्होंने कहा कि इस सोच को बदलने के लिए समाज को गहराई से आत्मनिरीक्षण करने की जरूरत है।

बच्चों को सिर्फ बच्चा समझना चाहिए, लड़का या लड़की नहीं

कंगना का मानना है कि जब तक परिवार और समाज बेटियों को बराबर सम्मान नहीं देंगे, तब तक वास्तविक प्रगति संभव नहीं है।

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