रिया सिन्हा: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब बिहार में ‘सुशासन 2.0’ के तहत ‘नया बिहार मॉडल’ पेश करने की तैयारी में हैं। चुनाव से पहले अपनी सरकार के खिलाफ उठ रहे सवालों का जवाब अब वह एक्शन से दे रहे हैं। हाल ही में उन्होंने सचिवालय और निगरानी विभाग की समीक्षा की, जहाँ उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और तेजी लाने का स्पष्ट निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार की योजनाओं का सीधा लाभ आम जनता तक पहुँचना चाहिए, और भ्रष्टाचार मुक्त राज्य बनाने के लिए निगरानी विभाग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह कदम राज्य में एक बेहतर और जवाबदेह प्रशासनिक व्यवस्था की नींव रखने की दिशा में देखा जा रहा है।
कल्याणकारी योजनाओं पर फोकस
‘नया बिहार मॉडल’ की तैयारी में कल्याणकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर उतारने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, कई परिवारों में अब एक से अधिक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँच रहा है। उदाहरण के लिए, एक परिवार में महिला को मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का लाभ मिला है, जबकि उनकी सास और पति को बढ़ी हुई सामाजिक सुरक्षा पेंशन मिल रही है। इसके अलावा, बेटी को स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना से उच्च शिक्षा के लिए लोन मिला है। सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि को 400 रुपये से बढ़ाकर 1100 रुपये कर दिया गया है। यह दर्शाता है कि सरकार समावेशी विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए योजनाओं का दायरा बढ़ा रही है ताकि समाज के हर वर्ग को लाभ मिल सके।
विकास का रोडमैप और भविष्य की तैयारी
नए मॉडल में केवल सामाजिक कल्याण ही नहीं, बल्कि बुनियादी ढाँचे और कौशल विकास पर भी जोर दिया जा रहा है। सड़कों से लेकर बिजली तक की सुविधाओं को सुदृढ़ करने के साथ-साथ, ‘सुशासन 2.0’ में ‘अर्बनाइजेशन एंड इंडस्ट्रियलाइजेशन’ (शहरीकरण और औद्योगीकरण) को अगले चरण के रूप में देखा जा रहा है। इसके तहत मुख्यमंत्री कौशल केंद्र पूरे राज्य में फैलाए जाएंगे, जहाँ युवाओं को आईटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक व्यावसायिक कौशल में प्रशिक्षण मिलेगा। साथ ही, जीविका मॉडल को भी बढ़ाकर ग्रामीण महिलाओं की आय दोगुनी करने का लक्ष्य है। नीतीश कुमार अब एक ऐसे विकास मॉडल पर काम करते नजर आ रहे हैं जो बिहार को देश के शीर्ष समृद्ध राज्यों में शामिल करने की क्षमता रखता है।

