रिया सिन्हा: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से ठीक पहले विपक्षी महागठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर दरारें गहरी हो गई हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने बड़ा ऐलान करते हुए बिहार में चुनाव न लड़ने का फैसला किया है। नामांकन की आखिरी तारीख खत्म होने से ठीक पहले लिया गया यह निर्णय महागठबंधन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। JMM ने इस स्थिति के लिए सीधे तौर पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है।
गठबंधन सहयोगियों पर JMM का ‘धोखाधड़ी’ का आरोप
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पार्टी JMM ने आरोप लगाया है कि राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस ने “राजनीतिक साज़िश” के तहत उन्हें सीटों से वंचित किया। जेएमएम नेता सुदिव्य कुमार ने कहा कि उनकी पार्टी को महागठबंधन ने सम्मान नहीं दिया। जेएमएम पहले छह सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी में थी, जिनके लिए उम्मीदवारों की सूची भी जारी कर दी गई थी। ये सीटें बिहार-झारखंड सीमा से सटी हुई हैं, जहां आदिवासी वोटरों की अच्छी खासी संख्या है।
महागठबंधन में आंतरिक कलह उजागर
जेएमएम के इस बड़े ऐलान ने महागठबंधन में जारी आंतरिक कलह को एक बार फिर उजागर कर दिया है। राजद और कांग्रेस के बीच भी कई सीटों पर सहमति नहीं बन पाई है, जिसके कारण दोनों पार्टियों के उम्मीदवार कई जगह एक-दूसरे के खिलाफ चुनावी मैदान में उतर गए हैं। वहीं, आरजेडी ने अकेले ही 143 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। जेएमएम का बाहर होना न केवल गठबंधन की एकता को कमजोर करता है, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों के आदिवासी वोट बैंक पर भी इसके असर पड़ने की आशंका है। जेएमएम ने अब झारखंड में भी कांग्रेस और आरजेडी के साथ अपने गठबंधन संबंधों की समीक्षा करने की बात कही है।

