रिया सिन्हा
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भोजपुरी स्टार पवन सिंह की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में वापसी हो गई है। लोकसभा चुनाव के दौरान बागी होकर काराकाट से निर्दलीय लड़ने और एनडीए उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा की हार का कारण बनने के बाद, यह ‘घर वापसी’ भाजपा का बड़ा चुनावी दांव मानी जा रही है। मंगलवार को पवन सिंह ने पहले राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के मुखिया उपेंद्र कुशवाहा से मुलाकात की और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा से भी मुलाकात कर गिले-शिकवे दूर किए।
कुशवाहा-राजपूत समीकरण पर नज़र
लोकसभा चुनाव 2024 में पवन सिंह के काराकाट से उतरने के कारण शाहाबाद और मगध क्षेत्र में राजपूत और कुशवाहा मतदाताओं के बीच एक गहरी खाई पैदा हो गई थी। इसका सीधा नुकसान एनडीए को उठाना पड़ा और काराकाट समेत आसपास की कई लोकसभा सीटें हाथ से निकल गईं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पवन सिंह की वापसी और उपेंद्र कुशवाहा के साथ उनकी सुलह इसी ‘डैमेज कंट्रोल’ का हिस्सा है। भाजपा की रणनीति है कि पवन सिंह की लोकप्रियता और राजपूत वोटों पर उनके असर का इस्तेमाल कर, वह कुशवाहा वोटों को भी उपेंद्र कुशवाहा के साथ एकजुट रखे। अगर भाजपा इस कुशवाहा-राजपूत समीकरण को साधने में सफल होती है, तो विधानसभा चुनाव में उसे दक्षिण बिहार के शाहाबाद और मगध क्षेत्र में बड़ी राहत मिल सकती है। भाजपा पवन सिंह को स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल कर सकती है।
