रिया सिन्हा: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 1 नवंबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार में अपनी पूरी ताकत झोंक दी। खराब मौसम के कारण उनके हेलिकॉप्टर को पटना एयरपोर्ट से उड़ान भरने में मुश्किल हुई, जिसके चलते उन्हें अपनी कुछ रैलियों को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करना पड़ा। उन्होंने वैशाली के हाजीपुर, गोपालगंज और समस्तीपुर की जनसभाओं को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया। शाह ने अपने भाषणों में मुख्य रूप से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेतृत्व वाले महागठबंधन पर ‘जंगलराज’ की वापसी का आरोप लगाया और मतदाताओं से एनडीए को वोट देने की अपील की।
विकास बनाम ‘जंगलराज‘ का चुनाव
शाह ने इस चुनाव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विकास एजेंडे और महागठबंधन के ‘जंगलराज’ के बीच का चुनाव बताया। उन्होंने कहा कि एक तरफ वे लोग हैं जिन्होंने बिहार में ‘जंगलराज’ शुरू किया, वहीं दूसरी तरफ मोदी-नीतीश की जोड़ी है जिसने राज्य में सुशासन और विकास लाया है। गोपालगंज में, जो लालू प्रसाद यादव का गृह जिला है, शाह ने लालू-राबड़ी शासनकाल के दौरान हुई कथित कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति और अपराधों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता को यह तय करना है कि वे फिर से अपराध और अपहरण का दौर चाहते हैं या विकास की राह पर चलना चाहते हैं।
घुसपैठियों और किसानों पर कड़ा रुख
गृह मंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी हमला बोला और उन पर घुसपैठियों के समर्थन में यात्राएं निकालने का आरोप लगाया। शाह ने स्पष्ट किया कि एनडीए सरकार देश और बिहार से एक-एक घुसपैठिए को बाहर निकालेगी और उनका नाम मतदाता सूची से हटाएगी। उन्होंने एनडीए के घोषणापत्र की प्रमुख बातों पर भी जोर दिया, जिसमें किसानों और महिलाओं के सशक्तिकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया है। शाह ने बिहार के 27 लाख किसानों को दी जाने वाली वार्षिक ₹6,000 की राशि को बढ़ाकर ₹9,000 करने का वादा किया और कहा कि सभी बंद चीनी मिलों को पांच साल के भीतर फिर से खोला जाएगा।

