Muskan Garg: तेलंगाना राज्य में कुछ दिनों से आवारा कुत्तों और बंदरों को कथित ज़हर देने की दर्दनाक घटनाओं की खबर सामने आ रही है, जिसने न सिर्फ पशु प्रेमियों बल्कि आम जनता और प्रशासनिक अधिकारियों को भी गहराई से झकझोर दिया है।

कुत्तों पर सामूहिक ज़हरकुशी: एक भयावह सिलसिला:
तेलंगाना के कई जिलों में आवारा कुत्तों की सामूहिक हत्या की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं। हनुमाकोंडा जिले के पथिपका गाँव में लगभग 200 आवारा कुत्तों को कथित तौर पर ज़हर देकर मार दिया गया था, जो राज्य में पिछले एक महीने में कुत्तों की मौतों को 1,000 से ऊपर ले जा चुका है।
इन मौतों में स्थानीय ग्राम पंचायत के नेताओं और सरपंचों की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जिन पर चुनाव से पहले किए गए वादों को पूरा करने के लिए इस प्रकार की कार्रवाई कराने का आरोप लगाया जा रहा है।
समय के साथ, नागर्कुर्नूल जिले के थिम्मैपल्ली गाँव में भी लगभग 100 कुत्तों के ज़हर दिए जाने की रिपोर्ट सामने आई, जिससे कुल मौतों की संख्या लगभग 1,200 तक पहुँच चुकी है।
पुलिस ने कुछ मामलों में एफआईआर दर्ज की है और जांच जारी है, लेकिन पशु अधिकार संगठनों का कहना है कि ऐसी घटनाओं से न केवल कानून का उल्लंघन होता है बल्कि इंसानियत और नैतिकता भी शर्मसार होती है।

बंदरों पर जहरखुरानी: 15 की मौत, कई घायल:
इसी बीच, कामारेड्डी जिले के अंतम्पल्ली गाँव के पास एक ढाबे के पास बंदरों को कथित तौर पर जहर देकर मार दिया गया, जिससे कम से कम 15 बंदरों की मौत हो गई और लगभग 80 अन्य गंभीर रूप से बीमार पाए गए।
यह घटना स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं के लिए भी चिंता का विषय बनी हुई है, क्योंकि बंदर आम तौर पर इंसानों के साथ जीवन साझा करते हैं और उनके इस तरह मारे जाने से जैविक संतुलन तथा लोगों की सुरक्षा पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

कानूनी और सामाजिक प्रतिक्रिया:
इन भयावहन घटनाओं के बाद पुलिस और प्रशासन ने जांच तेज कर दी है। कई जगह FIR दर्ज की गई हैं और मामले की गंभीरता से समीक्षा चल रही है।
पशु अधिकार कार्यकर्ताओं तथा अधिकारियों का जोर है कि इस तरह के क़दम कानूनन अपराध हैं और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को पशु क्रूरता अधिनियम तथा अन्य संबंधित कानूनों के अंतर्गत सख़्त कार्रवाई का सामना करना चाहिए।
साथ ही, ये घटनाएँ यह भी दर्शाती हैं कि आवारा जानवरों की संख्या और उनके साथ लोगों के बढ़ते संघर्ष को हल करने के लिए मानवता के साथ-साथ वैज्ञानिक और संवेदनशील उपायों की आवश्यकता है न कि निर्दयता या हिंसा की।

तेलंगाना में कुत्तों और बंदरों पर हुए ज़हरकुशी के लगातार मामले बहुत ही चिंताजनक हैं। यह घटनाएँ न सिर्फ पशु अधिकारों की गंभीर उपेक्षा को उजागर करती हैं, बल्कि यह भी दिखाती हैं कि समाज में सहानुभूति, कानून का सम्मान और जिम्मेदार प्रशासन कितने महत्वपूर्ण हैं। ये दुखद खबरें हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि जीव-जंतुओं के प्रति हमारी जिम्मेदारियाँ क्या हैं, और हम एक बेहतर, दयालु समाज कैसे बना सकते हैं।

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