शिवानी यादव। भोपाल- माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. डॉ. अविनाश बाजपेयी की शैक्षणिक योग्यता को लेकर राष्ट्रीय छात्र संगठन ने गंभीर सवाल उठाए हैं। राष्ट्रीय छात्र संगठन विश्वविद्यालय प्रभारी तनय शर्मा ने 29 अप्रैल 2025 को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन देकर कुलसचिव की शैक्षणिक डिग्रियों और पीएचडी प्रमाण पत्रों की सत्यापित प्रतियां माँगी थीं।

इसी आवेदन में विश्वविद्यालय के भोपाल, रीवा, खंडवा और दतिया परिसरों में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों की संख्या तथा पिछले एक वर्ष में छात्र शिकायत प्रकोष्ठ में दर्ज की गई शिकायतों की जानकारी भी माँगी गई थी।
कुलसचिव की डिग्री और पीएचडी सार्वजनिक नहीं
18 जून 2025 को प्राप्त विश्वविद्यालय के उत्तर में कहा गया कि पिछले एक वर्ष में कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई है। कर्मचारियों की संख्या की जानकारी स्पष्ट नहीं दी गई। सबसे बड़ी बात यह रही कि कुलसचिव की डिग्री और पीएचडी से जुड़ी जानकारी को तीसरे पक्ष की ‘व्यक्तिगत जानकारी’ मानते हुए देने से इनकार कर दिया गया। साथ ही यह बताया गया कि संबंधित अधिकारी ने यह जानकारी सार्वजनिक करने की अनुमति नहीं दी है।

राष्ट्रीय छात्र संगठन का कहना है कि, जब कोई व्यक्ति सार्वजनिक पद पर होता है, तो उसकी शैक्षणिक योग्यताएं गुप्त नहीं हो सकतीं। अगर कुलसचिव योग्य हैं, तो जानकारी छिपाने की जरूरत क्यों? संगठन ने यह भी कहा कि डॉ. बाजपेयी स्वयं RTI के प्रथम अपीलीय अधिकारी हैं, जिससे हितों का टकराव पैदा होता है।
विश्वविद्यालय की हर कक्षा में CCTV कैमरे लगाए जाएँ
तनय शर्मा ने यह भी कहा कि आज शिक्षा की गिरावट का सबसे बड़ा कारण वे शिक्षक हैं जो खुद विषय की समझ नहीं रखते और नियमित रूप से कक्षा में नहीं आते। ऐसे शिक्षक छात्रों के भविष्य से खेलते हैं। अब समय आ गया है कि विश्वविद्यालय की हर कक्षा में CCTV कैमरे लगाए जाएँ ताकि यह देखा जा सके कि ‘गुरुजी’ कितनी बार दर्शन देते हैं।
राष्ट्रीय छात्र संगठन ने अपनी माँगों में कहा है कि:
1. मुख्यमंत्री और कुलगुरु इस मामले पर तुरंत ध्यान दें।
2. एक स्वतंत्र जांच समिति गठित की जाए।
3. जांच पूरी होने तक डॉ. बाजपेयी को कुलसचिव पद से मुक्त किया जाए ।
4. विश्वविद्यालय की सभी कक्षाओं में CCTV कैमरे लगाए जाएँ ताकि पारदर्शिता बनी रहे ।
संगठन ने यह चेतावनी भी दी है कि, यदि प्रशासन चुप्पी साधे रखता है, तो छात्र संगठन आंदोलन करेगा और यह मामला पूरे राज्य में सार्वजनिक मंचों पर उठाया जाएगा। वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
