ऋषिता गंगराडे़
महिला सशक्तिकरण किसी भी समाज की प्रगति की बुनियाद है। मध्यप्रदेश सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में बेटियों की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए कई योजनाएँ शुरू की हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य बेटियों को न केवल सुरक्षित वातावरण देना है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाना भी है।
शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति
लाड़ली लक्ष्मी योजना राज्य की सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक है। इस योजना के अंतर्गत बेटियों को जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक आर्थिक सहायता दी जाती है। परिणामस्वरूप, ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में भी बालिकाओं की स्कूलों में उपस्थिति बढ़ी है। साथ ही, साइकिल योजना और छात्रवृत्ति योजनाओं ने बेटियों को पढ़ाई जारी रखने में मदद की है।
स्वास्थ्य और पोषण
महिलाओं और बालिकाओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और आंगनवाड़ी सेवाओं को मजबूत किया है। इनसे बेटियों को बेहतर पोषण और समय पर स्वास्थ्य सेवाएँ मिल रही हैं। खासकर कुपोषण को कम करने में सकारात्मक बदलाव देखा गया है।
आत्मनिर्भरता और रोजगार
सरकार द्वारा चलाए जा रहे लिवelihood मिशन और महिला स्व-सहायता समूह (SHGs) ने बेटियों और महिलाओं को छोटे-छोटे रोजगार उपलब्ध कराए हैं। इससे न केवल आर्थिक सशक्तिकरण हुआ है, बल्कि समाज में उनका सम्मान भी बढ़ा है।
सामाजिक बदला
वइन योजनाओं का प्रभाव समाज में सोच बदलने के रूप में भी देखने को मिला है। पहले जहाँ बाल विवाह जैसी कुरीतियाँ आम थीं, वहीं अब माता-पिता अपनी बेटियों को पढ़ाई और करियर के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। बेटियाँ परिवार की जिम्मेदारी उठाने के साथ-साथ समाज में उदाहरण भी प्रस्तुत कर रही हैं।
मध्यप्रदेश में बेटियों के लिए शुरू की गई सरकारी योजनाएँ केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक सोच और व्यवहार में भी बड़ा बदलाव ला रही हैं। बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाए गए ये कदम राज्य के उज्ज्वल भविष्य की नींव साबित हो रहे हैं।
स्रोत: सामाजिक अध्ययन एवं शोध रिपोर्ट
