रानू यादव: मानसिक जादूगर (मेंटलिस्ट) सुहानी शाह ने इटली के टोरिनो में आयोजित FISM वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ मैजिक 2025 में “बेस्ट मैजिक क्रिएटर” का प्रतिष्ठित खिताब जीतकर इतिहास बना दिया है। इस चैंपियनशिप को जादू की दुनिया का ‘ऑस्कर’ माना जाता है। यह सम्मान जीतने वाली पहली भारतीय बनी।
सुहानी शाह ने यह खिताब ऑनलाइन मैजिक कैटेगरी में जीता है, जहां उन्होंने जैक रोड्स (यूके), जेसन लाडानये (यूएसए), और मोहम्मद इमानी (दुबई) जैसे अंतरराष्ट्रीय दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया।
कहां से शुरू हुआ जादू सीखने का दौर?
सुहानी ने 6 साल की उम्र में जादू सीखना शुरू कर दिया था और 7 साल की उम्र में उन्होंने अपनी पढ़ाई छोड़कर इसी जुनून को पूरा करने का फैसला किया। उनका पहला शो गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री के सामने हुआ था। वह अपनी परफॉर्मेंस में मनोविज्ञान, कहानी कहने और मानव व्यवहार का समझने का प्रयास करती है।
यह जीत भारत के लिए गौरवपूर्ण है।FISM की स्थापना 1948 में हुई थी और यह हर तीन साल में आयोजित होता है, जिसे एक जादूगर के लिए सर्वोच्च सम्मान माना जाता है।
कहां से मिली पहचान?
सुहानी को यह पहचान ऑस्ट्रेलियन टेलिवीजन शो द प्रोजेक्ट से मिला। जिसने उन्होंने एक इंटरव्यूअर के iphone का पासवर्ड सही बताया साथ है अपने मेंटलिस्ट कौशल का इस्तेमाल करके दूसरे प्रेजेंटर के क्रश के बारे में सही जानकारी दी।इसके बाद से ही इनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए।
कैसे हासिल हुआ यह मुकाम?
सुहानी 6 साल से ही मैजिशियन बनना चाहती थी। लेकिन परिवार वालों और समाज का कहना था कि लड़कियों के लिए क्या प्रोफेशन अच्छा नहीं माना जाता है। इन सब के बावजूद उनके पिता ने उनके सपनों को पूरा करने में उनका पूरा सहयोग किया। उनके पिता खुद एक मैजिशियन थे।
सुहानी ने गोवा में खुद का क्लीनिक शुरू किया था। यहां वो लोगों की एंजायटी डिप्रेशन स्ट्रेस आदि से निपटने में मदद करती थी हालांकि स्टेज शो की वजह से उन्हें क्लीनिक बंद करना पड़ा।
शिवानी ने एक मोटिवेशनल बुक भी लिखा है जिसका नाम है “Unleash Your Hidden Powers” यह बुक इस बात को महसूस करने और समझने के बारे में है कि इस दुनिया में हर कोई पूर्ण है। बस जरूरत है तो अपनी आंतरिक क्षमताओं को पहचानने की, जिसके बारे में वह पूरी तरह से अनजान है।
धीरेंद्र शास्त्री के चमत्कार को ठहराया झूठा!
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के कथित चमत्कारों को लेकर उठे विवाद के बीच, प्रसिद्ध मेंटलिस्ट सुहानी शाह ने इन दावों को झूठा ठहराया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि धीरेंद्र शास्त्री जो कुछ भी करते हैं, वह कोई दिव्य शक्ति या चमत्कार नहीं, बल्कि मनोरंजन और माइंड रीडिंग की एक कला है, जिसे कोई भी सीख सकता है।
सुहानी शाह ने विभिन्न मंचों पर अपने लाइव प्रदर्शनों के माध्यम से दिखाया है कि कैसे लोगों के मन की बातें पढ़ी जा सकती हैं और उन्हें सटीक रूप से बताया जा सकता है। उन्होंने बताया कि यह हाव-भाव, शारीरिक भाषा और मनोवैज्ञानिक तकनीकों को समझने का परिणाम है। उनके अनुसार, ट्रिक को कृपा कहना गलत है, और यह लोगों की उम्मीदों और विश्वास का फायदा उठाने जैसा है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि धीरेंद्र शास्त्री के कथित चमत्कार अंधविश्वास को बढ़ावा देते हैं, जबकि माइंड रीडिंग एक कला है जो दशकों से मौजूद है और इसे पाखंड नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि अगर धीरेंद्र शास्त्री के पास सच में कोई दैवीय शक्ति है, तो उन्हें इसका उपयोग समाज की भलाई के लिए करना चाहिए, जैसे जोशीमठ जैसी आपदाओं को रोकना।
