रिपोर्ट, काजल जाटव: बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए ये ऐलान किया है कि 1 अगस्त 2025 से राज्य के हर घरेलू ग्राहक को 125 यूनिट तक बिजली फ्री दी जाएगी। इसका मतलब ये है कि अब जुलाई महीने का बिल ही आखिरी होगा जिसमें 125 यूनिट तक इस्तेमाल करने वालों को कोई चार्ज देना पड़ेगा। ये फैसला नीतीश सरकार की समाजिक मदद और गरीब, मध्यम वर्गीय परिवारों को राहत देने वाली नीतियों का हिस्सा है।

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा मास्टरस्ट्रोक

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले ये एक धमाकेदार मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। चुनाव आयोग की तरफ से उम्मीद है कि अक्टूबर-नवंबर में चुनाव होंगे, तो इस स्थिति में बिहार सरकार का ये फैसला सीधे वोटरों को लुभाने की कोशिश करता हुआ नजर आ रहा है। बिहार में बिजली का मसला काफी लंबे वक्त से चलता आ रहा है। हालांकि हाल के वर्षों में बिजली सप्लाई में सुधार आया है, फिर भी सरकार ने गरीबों और मध्यम वर्ग को ध्यान में रखते हुए मुफ्त बिजली मुफ्त देने का ये कदम उठाया है, ताकि लोगों का खर्च कम हो सके और उन्हें राहत मिल सके।

लाभ किन उपभोक्ताओं को?

ये योजना सभी घरेलू बिजली ग्राहकों को फायदा पहुंचाएगी जिनकी महीने भर में बिजली की खपत 125 यूनिट या उससे कम है। खासकर ग्रामीण इलाकों, निम्न-मध्यम वर्ग और शहरी गरीब वर्ग के लिए ये सीमा तय की गई है। बिहार में अभी भी बहुत से घर हैं जिनकी घरेलू खपत 100 यूनिट से नीचे ही रहती है, तो ये फैसला लगभग 60-70% उपभोक्ताओं को राहत देगा।

बिजली दरें पहले और अब

पहले की व्यवस्था में, 125 यूनिट तक बिजली का भुगतान जरूरी था। बिजली की दरें – बिहार में आमतौर पर ₹6 से ₹7 प्रति यूनिट के बीच रहीं हैं।

उदाहरण के तौर पर पहले-

  • 50 यूनिट: ₹6.10/यूनिट 
  • 51–100 यूनिट: ₹6.95/यूनिट 
  • 100 यूनिट से ऊपर: ₹7.50 या उससे अधिक फिक्स चार्ज (₹40–₹100 प्रति माह) और मीटर रेंट भी देना पड़ता था। मान लेते हैं कि कोई व्यक्ति 125 यूनिट बिजली का इस्तेमाल करता था, तो उसका मासिक बिल करीब ₹850 से ₹950 के बीच आता था। और कोई सब्सिडी नहीं थी, सिर्फ बिलो के सीमित वर्ग जैसे BPL कार्ड धारकों और कृषि उपभोक्ताओं को ही थोड़ी बहुत सहायता मिलती थी। लेकिन अगस्त 2025 से शुरू हो रही नई योजना अब घरेलू उपभोक्ताओं के लिए खुशखबरी है। 125 यूनिट आने तक बिजली का बिल नहीं देना होगा, चाहे आप शहर में रहे या गांव में। उदाहरण के तौर पर: पहले 125 यूनिट पर आपका बिल लगभग ₹900 तक बनता था, लेकिन अब उस सीमा में बिल बिलकुल नहीं आएगा। इससे आपके हर महीने ₹850 से ₹950 तक की बचत हो सकती है, यानी सालाना ₹10,000 से ऊपर की राहत मिलेगी।

राजकोषीय दबाव या बैंक सशक्तिकरण

हालांकि विपक्ष इस कदम को सिर्फ एक चुनावी स्टंट कह रहा है, लेकिन नीतीश कुमार ने साफ किया है कि ये योजना सरकारी संसाधनों और बजट के हिसाब से ही चलाई जाएगी। उनका कहना है कि इस पर हर साल करीब 3500 से 4000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। मुख्यमंत्री ने ये भी बताया कि बिहार की आर्थिक स्थिति पहले से ही बेहतर हो रही है, इसलिए गरीबों को राहत देने के लिए ये फैसला सही है।

क्या असर पड़ेगा इसका चुनाव पर?

नीतीश कुमार ने इस फैसले के साथ ही संकेत दे दिया है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में वे पूरी मजबूती से मैदान में उतरेंगे और लोगों के हित के मुद्दों को ही तरजीह देंगे। ये योजना उनके गठबंधन के लिए भी एक मजबूत मुद्दा बन सकती है। अगर ठीक से लागू हो गई, तो ये न सिर्फ लाखों लोगों को राहत पहुंचाएगी, बल्कि नीतीश कुमार की राजनीतिक वापसी को भी तेज कर सकती है। 

बिहार में मुफ्त बिजली का ये प्रोजेक्ट सिर्फ एक चुनावी जुगाड़ नहीं है, बल्कि नीतीश सरकार की लोकप्रियता बढ़ाने और सही तरीके से शासन करने की रणनीति का भी हिस्सा है। आने वाले दिनों में इसका राजनीतिक असर कितनी गति पकड़ता है, ये तो वक्त बताएगा, लेकिन इस फैसले को लेकर अभी से ही जनता में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

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