काजल जाटव: असम में स्वदेशी समुदायों की सुरक्षा के लिए नया शुरू किया जा रहा है, और सरकार का ये फैसला काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने एलान किया है कि असम सरकार एक ऑनलाइन शस्त्र लाइसेंस पोर्टल शुरू कर रही है ताकि वहां रहने वाले स्वदेशी लोगों को हथियार रखने का काम आसान हो सके। यह पोर्टल अगस्त के पहले हफ्ते यानी 1 से 7 अगस्त के बीच शुरू किया जाएगा।

स्वदेशी अस्तित्व की लड़ाई

सीएम हिमंता बिस्व सरमा ने कहा कि ये कदम खासतौर पर ऐसे इलाकों के लिए है जहां वे लोग खुद को सुरक्षित महसूस न करते हों। इसका मकसद उन क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाना है, जहां सरकार असमिया और हिंदू समुदाय को खतरे में देख रही है। हाल के समय में, जब सरकार अवैध प्रवासियों और अतिक्रमणकारियों को वन भूमि और दलदलों से साफ करने की मुहिम चला रही है, तो ये कदम और भी जरूरी हो जाता है। इनमें से अधिकतर लोग बंगाली भाषी मुसलमान हैं, जो बांग्लादेश से आए हैं। मुख्यमंत्री ने 21 जुलाई को डिजिटल प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो भी पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने बताया कि अगर नहीं रुका गया तो आने वाले 10 साल में असमिया और हिंदू समुदाय खुद को अल्पसंख्यक महसूस कर सकते हैं।

उन्होंने 1951 की जनगणना का हवाला देते हुए कहा कि पिछले कुछ दशकों में असम की जनसंख्या में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने साफ कहा, “हमें उस समुदाय को फिर से जीवित करना है, जिस जब तक हम जागरूक नहीं होंगे, हमारे स्वदेशी समुदाय का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।”

पोर्टल का उद्देश्य और प्रक्रिया 

पोर्टल का मकसद खास तो पर असम के स्वदेशी लोगों को सुरक्षा देना है, जो संवेदनशील इलाकों में रहते हैं और खुद की रक्षा करना चाहते हैं। इसमें आवेदन की प्रक्रिया डीसी स्तर पर होगी, जो तेज और पारदर्शी बनाई गई है। योग्य आवेदकों को हथियार का लाइसेंस दिया जाएगा। जहां सरकार का यह कदम स्वदेशी समुदाय के लिए अच्छा माना जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक चर्चा भी शुरू हो गई है। विपक्ष और कुछ मानवधिकार संगठन कह रहे हैं कि इससे समाज में तनाव बढ़ सकता है और धार्मिक विभाजन को बढ़ावा मिल सकता है। लेकिन सरकार इसे सुरक्षा और उनकी पूरी संस्कृति को बचाने की कोशिश बता रही है। 

यह निर्णय असम के लंबे संघर्ष का हिस्सा है, जो अपनी सांस्कृतिक, धार्मिक और जनसांख्यिकीय बहुलता को बनाए रखने का प्रयास है। यह पोर्टल न केवल स्वदेशी लोगों के अधिकार की बात करता है बल्कि सरकार अब सुरक्षा के लिए और मजबूत कदम उठाने को तैयार दिख रही है। जरूरी यह है कि इस व्यवस्था का गलत इस्तेमाल न हो, और इसे सही तरीके से सामाजिक सुरक्षा के लिए उपयोग किया जाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *