गीता : मध्य प्रदेश में पर्यावरण को सुरक्षित रखने और बढ़ते जल-वायु प्रदूषण को रोकने के लिए राज्य सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। अब प्रदेश के हर जिले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) के कार्यालय खोले जाएंगे। इस कदम का मकसद है कि प्रदूषण पर समय रहते निगरानी रखी जा सके और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
हर जिले में पीसीबी के कार्यालय होंगे
अभी तक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय कुछ ही प्रमुख शहरों में थे, जिससे दूर-दराज के जिलों में पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं पर समय पर ध्यान नहीं दिया जा पाता था। अब जब हर जिले में पीसीबी के कार्यालय होंगे, तो स्थानीय स्तर पर पर्यावरण की निगरानी और जांच करना आसान हो जाएगा। इस प्रक्रिया की शुरुआत कटनी, गुना और देवास जिलों से हो चुकी है।
लोगों की भी भागीदारी बढ़ेगी
इन जिलों में पहले से मौजूद क्षेत्रीय कार्यालयों को अब जिला कार्यालयों में बदला जा रहा है। इससे यह तय होगा कि स्थानीय उद्योगों, फैक्ट्रियों और अन्य प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर सीधे नजर रखी जा सके। नए जिला कार्यालयों के खुलने से आम लोगों की भी भागीदारी बढ़ेगी। अगर कहीं पर जल, वायु या ध्वनि प्रदूषण की शिकायत है, तो लोग सीधे अपने जिले के पीसीबी कार्यालय में जाकर रिपोर्ट कर सकेंगे। इससे शिकायतों का समाधान जल्दी और प्रभावी ढंग से हो सकेगा।
राज्य सरकार का मानना है कि अगर स्थानीय स्तर पर ही प्रदूषण की रोकथाम शुरू कर दी जाए, तो बड़े स्तर पर पर्यावरण की रक्षा करना आसान होगा। इसके लिए भविष्य में अन्य जिलों में भी तेज़ी से कार्यालय खोलने की योजना है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी है
यह कदम न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक बेहतर और स्वच्छ भविष्य की ओर बढ़ने का संकेत है। बता दें कि प्रदेश में अभी केवल संभागीय मुख्यालयों और औद्योगिक शहरों में ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दफ्तर और मानिटरिंग यूनिट हैं। यह भी बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन तय सीमा से देश में प्रदूषण अधिक है। इससे भारतीयों की उम्र 3.5 साल घट रही है। इस संकेत से देशभर में चिंता बढ़ी है। जानकारी के अनुसार 2023 में वायु प्रदूषण का स्तर तय सीमा से आठ गुना अधिक पाया गया था।
