ऋषिता गंगराडे़

उत्तर प्रदेश के मथुरा ज़िले से आने वाले प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गए हैं। हाल ही में एक प्रवचन के दौरान उन्होंने ‘बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड’ संस्कृति पर अपनी चिंता जताई और कहा:

“अगर लड़कियां घर से बाहर निकलकर बॉयफ्रेंड बनाना शुरू कर देंगी, तो फिर शादी के बाद पति-पत्नी के रिश्ते में विश्वास कैसे बच पाएगा?”

उनका यह बयान जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, देशभर में इसकी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ लोगों ने इसे भारतीय संस्कृति की रक्षा के रूप में सराहा, तो वहीं एक बड़ा वर्ग—खासकर युवाओं और प्रगतिशील संगठनों ने इसे महिला स्वतंत्रता पर हमला बताया।

सोशल मीडिया पर बवाल:

वीडियो के वायरल होते ही ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर विरोध शुरू हो गया। कई महिलाओं और युवतियों ने संत प्रेमानंद महाराज के प्रवचनों का बहिष्कार करने की मांग की और उनके खिलाफ ऑनलाइन अभियान शुरू किया। #BoycottPremanand ट्रेंड करने लगा।

जान से मारने की धमकी:

इस विरोध के बीच कुछ अज्ञात लोगों द्वारा संत प्रेमानंद महाराज को सोशल मीडिया और फोन कॉल्स के ज़रिए जान से मारने की धमकियाँ दी गईं। कुछ संदेशों में उन्हें कार्यक्रम छोड़ने या सार्वजनिक जीवन से हट जाने तक की धमकी दी गई।

महाराज के करीबी अनुयायियों ने इसकी जानकारी प्रशासन को दी और उन्हें सुरक्षा प्रदान करने की मांग की। मथुरा पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और साइबर क्राइम सेल को इन धमकियों की जांच सौंपी गई है।

प्रशासन की कार्रवाई:

पुलिस अधीक्षक (SP) ने बताया कि सोशल मीडिया पर फैलाए गए आपत्तिजनक कंटेंट और धमकियों के मामले में जांच शुरू कर दी गई है। जिन अकाउंट्स से धमकियां आई हैं, उनकी पहचान कर कार्रवाई की जाएगी।

महाराज की सफाई:

इस पूरे विवाद के बीच संत प्रेमानंद महाराज ने मीडिया से बातचीत करते हुए सफाई दी कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं था।

“मैंने भारतीय संस्कृति के मूल्यों को ध्यान में रखते हुए यह बात कही थी। मेरी बात को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। मेरा उद्देश्य समाज में नैतिकता और चरित्र निर्माण की बात करना था।”

महिलाओं की प्रतिक्रिया:

विरोध कर रही कुछ युवतियों ने इस बयान को ‘मनोवैज्ञानिक नियंत्रण’ और ‘पुरानी सोच का प्रतीक’ बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों से महिलाओं की स्वतंत्रता को नियंत्रित करने की कोशिश की जाती है, जो कि संविधान के मूल अधिकारों का उल्लंघन है।

कानूनी मोड़:

कुछ महिला संगठनों की ओर से एक वकील ने प्रेमानंद महाराज के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए स्थानीय अदालत में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कहा गया है कि उनके बयान से महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंची है और यह महिलाओं के खिलाफ नफरत फैलाने का कार्य है।

यह घटना दर्शाती है कि आज के दौर में धार्मिक नेताओं के वक्तव्य भी समाज को विभाजित कर सकते हैं। एक ओर धार्मिक मूल्य हैं, तो दूसरी ओर व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संवैधानिक अधिकार। ऐसे में यह ज़रूरी हो जाता है कि संवाद को सुसंवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया जाए ताकि समाज में सद्भाव बना रहे।

स्रोत (Source):

Navbharat Times, 5 अगस्त 2025
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