ऋषिता गंगराडे़
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 6 जून 2025 को अप्रत्याशित रूप से 50 बेसिस पॉइंट की कटौती करते हुए रेपो रेट को 6.0% से घटाकर 5.5% कर दिया। साथ ही कैश रिज़र्व रेशियो (CRR) में भी एक प्रतिशत अंक की गिरावट कर 3% कर दी गई है। यह 2025 में RBI द्वारा की गई तीसरी कटौती है, कुल मिलाकर 100 bps की कमी हुई है The Economic Times|
नीति का रुख: “Neutral”
इस बैठक में RBI ने अपनी मौद्रिक नीति की धारा को “accommodative” से बदलकर “neutral” कर दिया। इसका मतलब है कि अब MPC (Monetary Policy Committee) को ब्याज दरों में कमी, वृद्धि या मौजूदा स्तर बनाए रखने का विकल्प खुला है, और कोई पूर्वनिर्धारित रुख नहीं होगा |
Inflation और विकास: आंकड़ों की भूमिका
Retail Inflation (CPI) जून 2025 में लगभग 2.1% दर्ज की गई, और अप्रैल‑जून अवधि का औसत 2.7% रहा, which is below RBI’s projections |
आर्थिक वृद्धि Q1 में 7.4% रही, जबकि पूरा साल (FY26) हेतु अनुमानित वृद्धि दर 6.4‑6.5% है The Economic Times|
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया है कि “हमने Inflation की लड़ाई जीत ली है, लेकिन युद्ध अभी जारी है”, और आगे की नीति निर्णय आंकड़ों (inflation outlook एवं growth) पर आधारित होंगे The Times of India।
विशेषज्ञ दृष्टिकोण: डेटा‑डेपेंडेंट नीति
MPC के एक सदस्य सौगाता भट्टाचार्य ने कहा कि “neutral stance” नीति के लिए एक संतुलित दिशा प्रदान करती है—यह “pause” और “cut दोनों विकल्प खुला रखती है”—आगे निर्णय आने वाले आंकड़ों पर निर्भर करेंगे|
अंग्रेज़ी वित्तीय समाचारों के अनुसार, लगभग 75% अर्थशास्त्रियों की राय है कि 6 अगस्त 2025 की नीति बैठक में दरें अपरिवर्तित रखी जाएँगी, जबकि बाकी 25% संभवतः 25 bps और कटौती की उम्मीद कर रहे हैं |
विदेशी निवेशक और सॉवरेन बॉन्ड्स
RBI की मौजूदा नीति और संभावित कटौती की उम्मीदों के बीच, विदेशी निवेशक अब फिर से भारतीय सरकारी बॉन्ड्स में रुचि दिखा रहे हैं। हाल ही में दो दिन में विदेशी निवेश ₹1,29,000 करोड़ दर्ज करने योग्य रहा — इस प्रवृत्ति से यह संकेत मिलता है कि म्यूल्टीपल बैक्क्रेशन और आरबीआई की नीति लचीलापन बाजार में सकारात्मकता ला रहा है Reuters।
नीति प्रभाव: घर‑उधार और EMIs
CRR और repo रेट की कटौती से होम लोन, वाहन लोन आदि की EMIs कम होंगी, जिससे उपभोक्ता भार कम होगा। यह भारतीय कर्जदाताओं (borrowers) के लिए राहत की स्थिति है The Economic Times।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने निजी बैंकों की तुलना में कटौती को तेजी से अपना लिया है, जिससे मौद्रिक ट्रांसमिशन अधिक प्रभावी रूप से काम कर रहा है The Economic Times।
समग्र रणनीति: आगे की राह
| घटक | स्थिति |
| रेट क्षमता | ₹5.5% ហ current repo rate; अगले कटौती की संभावना सीमित |
| नीति रुख | “Neutral” stance: वृद्धि या कटौती दोनों विकल्प खुला |
| डेटा‑निर्भरता | मुद्रास्फीति और GDP डेटा पर निर्णय |
| अगले कदम की संभावना | दिसंबर 2025 तक एक और 25 bps कटौती की उम्मीद, संभवतः repo दर 5.25% तक |
RBI ने मुद्रास्फीति पर काबू पाया है और मांग‑आधारित विकास को बढ़ावा देने के लिए निर्णायक कदम उठाए हैं। हालांकि, “Neutral” नीति रुख संकेत है कि यह रुकने का समय है—नया फैसला अगले डेटा पर निर्भर करता है। यदि मुद्रास्फीति नीचे बनी रहती है और आर्थिक वृद्धि ठहराव का संकेत देती है, तो केंद्रीय बैंक वर्ष के अंत तक एक और ब्याज दर कटौती कर सकता है।
ग्राहक EMIs में राहत महसूस करेंगे, और सार्वजनिक बैंक ट्रांसमिशन में अधिक सहायक दिख रहे हैं। फिर भी, वैश्विक अनिश्चितता, व्यापार तनाव और मौसमी जोखिम जैसे कारक आगे की नीतियों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे
स्रोत-सूची
- June repo rate cut & stance shift
- Governor remarks on inflation battle & neutral stance
- MPC member’s perspective (Saugata Bhattacharya)
- Foreign investment in bonds
