ऋषिता गंगराडे़
भोपाल, मध्य प्रदेश: राजधानी भोपाल में ई-रिक्शा सेवाओं पर लगे प्रतिबंध के बाद जनता की परेशानियों की सच्चाई अब वीडियो क्लिप्स और जमीनी साक्ष्यों के ज़रिए सामने आ रही है। एक वायरल वीडियो क्लिप में प्रभावित नागरिकों की स्पष्ट नाराज़गी और दैनिक जीवन पर पड़े असर की तस्वीर उभरकर सामने आती है।
लोगों से बातचीत के मुख्य अंश:
- एक महिला यात्री (संभावित अस्पताल जा रहीं):”इतनी गर्मी में अस्पताल जाना है, कोई साधन नहीं मिल रहा… पहले ई-रिक्शा मिल जाता था, अब तो बसें भी टाइम से नहीं आतीं।
- “एक छात्र:”कॉलेज के लिए लेट हो गए। ई-रिक्शा बंद होने से सबसे ज़्यादा दिक्कत हमें ही हो रही है।
- ऑटो 30-40 रुपये मांगते हैं हर दिन, कैसे देंगे इतना?”एक बुजुर्ग नागरिक:”ई-रिक्शा तो हमारा सहारा था, अब पैदल चलना पड़ता है।
- इस उम्र में बहुत मुश्किल है बेटा…”रिक्शा चालक (गुस्से में):”हमें कोई नोटिस नहीं मिला, सीधे रोक दिया। हम गरीब लोग हैं, क्या करेंगे अब? घर चलाना मुश्किल हो गया है।”
जनता की माँग:
वीडियो में अधिकांश लोग प्रशासन से यह सवाल कर रहे हैं कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए, यह अचानक निर्णय क्यों लिया गया। बुजुर्गों, महिलाओं और छात्रों के लिए ई-रिक्शा न सिर्फ़ सस्ता बल्कि सबसे सुलभ साधन था।
इस वीडियो क्लिप से यह स्पष्ट होता है कि ई-रिक्शा सेवाओं पर प्रतिबंध से न केवल ड्राइवरों की आजीविका प्रभावित हुई है, बल्कि आम लोगों के रोजमर्रा के जीवन में भी अव्यवस्था फैल गई है।
प्रशासन की दलील:
भोपाल ट्रैफिक एसीपी उमेश त्रिपाठी का कहना है,
“हम यह प्रतिबंध अस्थायी रूप से लगा रहे हैं ताकि ट्रैफिक की व्यवस्था को नियंत्रित किया जा सके। भविष्य में व्यवस्थित रूट मैपिंग के बाद पुनः संचालन पर विचार किया जाएगा।”

रिक्शा यूनियन का विरोध:
ई-रिक्शा यूनियन के अध्यक्ष रईस खान ने कहा,”हम गरीब लोग हैं। अगर हमें चलने नहीं दिया जाएगा तो हमारे बच्चों का पेट कैसे भरेगा? प्रशासन को हमसे बात करनी चाहिए थी।”
प्रशासन को चाहिए कि वह जनभावनाओं का सम्मान करते हुए इस समस्या का व्यावहारिक समाधान निकाले — चाहे वह सीमित मार्गों पर संचालन हो, समय अनुसार परमिट, या फिर वैकल्पिक परिवहन सुविधाओं की उपलब्धता।
