ऋषिता गंगराड़े, अग्नि पत्रिका
परिचय
आयुष्मान भारत योजना, जिसे प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) भी कहा जाता है, भारत सरकार की एक ऐतिहासिक पहल है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को स्वास्थ्य बीमा के माध्यम से बेहतर इलाज प्रदान करना है। हर लाभार्थी को सालाना ₹5 लाख तक का कैशलेस इलाज सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में उपलब्ध करवाना इस योजना का मुख्य उद्देश्य है। लेकिन सवाल यह उठता है — क्या यह योजना **भ्रष्टाचार मुक्त** है? क्या यह योजना ज़रूरतमंदों तक ईमानदारी से पहुँच पा रही है? इस लेख में हम इसी पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
भ्रष्टाचार के आरोप और ज़मीनी सच्चाई
1. फर्जी लाभार्थी और अस्पतालों की धोखाधड़ी
देश के कई राज्यों में ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं जहाँ अस्पतालों ने **फर्जी मरीजों के नाम पर क्लेम उठाया**, इलाज बिना किए ही फाइलों में दिखाया गया, और योजना के नाम पर पैसे वसूले गए। उत्तर प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार जैसे राज्यों में **CBI और राज्य सतर्कता विभागों** ने इस प्रकार की शिकायतों पर जाँच की है।
2. डाटा हेरफेर और पहचान की गड़बड़िया
आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए आधार कार्ड और पारिवारिक पहचान की प्रक्रिया को कई जगहों पर दरकिनार किया गया। इससे असली जरूरतमंद लाभ से वंचित रह गए जबकि कुछ ‘संपन्न’ वर्गों के लोग इसका फायदा उठा पाए।
शिकायतें और पारदर्शिता की कोशिशें
ग्रिवांस रिड्रेसल सिस्टम (शिकायत निवारण प्रणाली)
सरकार ने योजना के तहत **14555 टोल फ्री नंबर**, वेबसाइट और मोबाइल ऐप के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने की सुविधा दी है। लेकिन अधिकतर ग्रामीण और कम साक्षर लोग इस तकनीकी व्यवस्था से वाकिफ नहीं हैं।
इंटीग्रेटेड डैशबोर्ड और डिजिटल मॉनिटरिंग
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) ने एक **रियल-टाइम डैशबोर्ड** तैयार किया है जिससे योजना की निगरानी की जा सके। यह पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
सुधार की दिशा में उठाए गए कदम
- सुधार की दिशा में उठाए गए कदम स्वास्थ्य मंत्रालय अब डेटा एनालिटिक्स और AI की मदद से यह जांचने की कोशिश कर रहा है कि किस अस्पताल ने कितने मरीजों का इलाज किया और कितना क्लेम उठाया।
- हॉस्पिटल ऑडिट और लाइसेंस रद्द जिन अस्पतालों पर फर्जीवाड़े के आरोप सिद्ध हुए, उनका पंजीकरण निलंबित किया गया है। 2023-24 में ही 400+ अस्पतालों को योजना से बाहर किया गया।
- लाभार्थियों की दोहरी पहचान की रोकथाम अब लाभार्थी पहचान की प्रक्रिया को और मजबूत किया जा रहा है, जिससे दोहरी प्रविष्टियों को रोका जा सके।economictimes.indiatimes.com
निष्कर्ष
आयुष्मान भारत वित्तीय व तकनीकी दृष्टि से सबसे बड़े स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रमों में से एक है। फर्जी क्लेम और फ्रॉड लगभग 0.5% से भी कम (कुल 8.39 करोड़ अस्पताल प्रशासनों में 3.42 लाख फ्रॉड रिपोर्ट) economictimes.indiatimes.com जो कि बड़े दल में मामूली अनुपात दिखाता है। फिर भी:
- सिस्टम की ताक़त – AI और डेटा-आधारित निगरानी ने स्पष्ट तौर पर लापरवाही और धोखाधड़ी को बेनकाब किया है।
- चुनौतियां – जमीनी जागरूकता की कमी, शिकायत प्रणाली की पहुँच की बाधाएँ और समय पर कार्रवाई अभी एक सतत प्रक्रिया है।
- अवश्यक उपाय – तकनीकी सशक्तिकरण, शिकायत निवारण के प्रति जन-जागरूकता, और समयबद्ध, सख्त कार्रवाई।
