ऋषिता गंगराडे़
उत्तराखंड के पवित्र तीर्थ नगरी हरिद्वार स्थित मनसा देवी मंदिर में रविवार की सुबह उस समय हाहाकार मच गया जब मंदिर के सीढ़ी मार्ग पर भीषण भगदड़ मच गई। इस दर्दनाक हादसे में 6 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 15 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा उस समय हुआ जब कांवड़ यात्रा के समापन के बाद हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन हेतु मंदिर की ओर बढ़ रहे थे।
हादसे का समय और कारण
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह करीब 8:15 बजे श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मंदिर की ओर बढ़ रही थी। जैसे-जैसे भीड़ मंदिर के मुख्य सीढ़ी मार्ग पर पहुंची, वहां अव्यवस्था फैलने लगी। एक वृद्ध महिला के गिरते ही पीछे से धक्का-मुक्की शुरू हो गई और लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरते चले गए।
एक स्थानीय दुकानदार ने बताया:
“इतनी भारी भीड़ का कोई नियंत्रण नहीं था। पुलिस और सुरक्षा गार्ड मौके पर बहुत कम संख्या में थे। अफरा-तफरी में लोग चिल्लाते हुए इधर-उधर भागने लगे।”
मृतकों और घायलों की पहचान
प्रशासन द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, मृतकों में 3 महिलाएं और 3 पुरुष शामिल हैं। सभी श्रद्धालु उत्तर प्रदेश और बिहार से आए थे। घायलों को हरिद्वार जिला अस्पताल और ऋषिकेश एम्स में भर्ती कराया गया है, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।
प्रशासनिक लापरवाही?
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने इस हादसे के लिए प्रशासन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। सोशल मीडिया पर घटना के वीडियो वायरल हो रहे हैं जिनमें देखा जा सकता है कि कैसे श्रद्धालु बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के सीढ़ियों पर चढ़ते जा रहे थे।
पूर्व नगर निगम सदस्य शिवराज मेहता ने कहा:
“हर साल लाखों लोग कांवड़ यात्रा के दौरान आते हैं, फिर भी भीड़ प्रबंधन की कोई ठोस योजना नहीं बनती। ये हादसा प्रशासन की नाकामी है।”
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है और जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने ट्वीट किया:
“मनसा देवी मंदिर में भगदड़ की घटना अत्यंत दुखद है। मृतकों के परिजनों को ₹5 लाख और घायलों को ₹1 लाख की सहायता दी जाएगी।”
आगे की कार्रवाई
- मजिस्ट्रियल जांच के आदेश
- मंदिर प्रबंधन समिति को कारण बताओ नोटिस
- भविष्य में हाईटेक भीड़ नियंत्रण प्रणाली लागू करने की घोषणा
- CCTV कैमरों की संख्या बढ़ाने और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती का वादा
हरिद्वार जैसे धार्मिक स्थलों पर हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं, परंतु भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था आज भी सवालों के घेरे में है। इस हादसे ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि धार्मिक आस्था को सुरक्षित वातावरण में संपन्न कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
जब तक पुख्ता व्यवस्थाएं नहीं होंगी, ऐसे हादसे देश की धार्मिक आस्थाओं को बार-बार हिला कर रखेंगे।
स्रोत:
- नवभारत टाइम्स
- आज तक
- अमर उजाला
