लेखक: ऋषिता गंगराडे
भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहाँ की खेती पूरी तरह मानसून पर निर्भर करती है। हर साल देश के करोड़ों किसान आसमान की ओर नज़रें टिकाए रखते हैं कि समय पर बारिश हो और फसल अच्छी हो। वर्ष 2025 का मानसून सामान्य से कुछ भिन्न रहा है, जिसका सीधा असर देश की कृषि व्यवस्था और किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ा है।
2025 का मानसून: सामान्य से कमजोर
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, वर्ष 2025 का दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से 10% कम रहा। कई राज्यों जैसे महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में बारिश कम हुई, वहीं पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में अत्यधिक वर्षा हुई जिससे बाढ़ जैसी स्थिति बनी।
किसानों पर प्रभाव:
- फसल उत्पादन में गिरावट:
कम वर्षा के कारण खरीफ फसलों जैसे धान, मक्का, सोयाबीन और कपास की बुवाई प्रभावित हुई। इससे फसल उत्पादन में 15-20% की गिरावट का अनुमान है। - बढ़ती लागत, घटती आमदनी: सिंचाई के लिए किसानों को बोरवेल और डीज़ल पंप का सहारा लेना पड़ा, जिससे उनकी लागत बढ़ गई। वहीं फसल कम होने से आमदनी में भी भारी गिरावट आई है।
- कर्ज़ का दबाव: बारिश की असमानता के कारण किसानों को नुकसान झेलना पड़ा और उन्हें फिर से साहूकारों या बैंकों से ऋण लेना पड़ा। कई जगह आत्महत्या की घटनाएं भी सामने आईं हैं।
- बाज़ार मूल्य और आपूर्ति संकट: फसलों की कमी के चलते खाद्यान्नों के दामों में वृद्धि देखी जा रही है। यह आम उपभोक्ताओं के लिए भी चिंता का विषय बन गया है।
स्रोत:
- भारतीय मौसम विभाग (IMD) रिपोर्ट, 2025
- कृषि मंत्रालय, भारत सरकार
- ग्रामीण कृषि अनुसंधान केंद्र रिपोर्ट 2025
सरकारी कदम:
सरकार ने कुछ राहत योजनाएं जैसे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, आपदा राहत फंड और विशेष सिंचाई योजनाएं चालू की हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका लाभ सभी किसानों को नहीं मिल पा रहा है। कई जगह किसानों को मुआवज़े की राशि समय पर नहीं मिल पाई।
वर्ष 2025 का मानसून एक चेतावनी है कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की नहीं, वर्तमान की चुनौती बन चुका है। किसानों की स्थिति को सुधारने के लिए सिर्फ राहत योजनाएं नहीं, बल्कि दीर्घकालिक समाधान जैसे सूखा-रोधी फसलें, जल संरक्षण, और कृषि तकनीकों का विस्तार ज़रूरी है। जब तक मानसून की अनिश्चितता रहेगी, तब तक किसानों की स्थिरता भी खतरे में रहेगी।
प्रमुख राज्य और क्षेत्रीय प्रभाव
- मध्य प्रदेश: सोयाबीन और धान की खेती बुरी तरह प्रभावित। किसानों ने 30% तक कम बुवाई की।
- महाराष्ट्र (विदर्भ): कपास किसानों पर दोहरा संकट – सूखा और कर्ज़।
- बिहार और उत्तर प्रदेश: मानसून देर से आया, जिससे धान की रोपाई प्रभावित हुई।
- कर्नाटक और केरल: अत्यधिक वर्षा से बाढ़, जिससे फसलों का नुकसान।
सरकार, नीति निर्माता, वैज्ञानिक और स्वयं किसान – सभी को मिलकर इस समस्या से लड़ना होगा।”कृषि सिर्फ भोजन नहीं, भारत की आत्मा है।”
