कामना कासोटिया, भोपाल। भारत के छोटे और सीमांत किसानों को अब केंद्र सरकार की नई योजना से बड़ी राहत मिलने वाली है। सरकार ने ‘प्रधानमंत्री समग्र कृषि योजना’ (PM-SKY) की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य देश के 1.7 करोड़ छोटे किसानों की आय बढ़ाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। इस योजना के तहत अगले 5 सालों में सरकार कुल 24,000 करोड़ रुपये खर्च करेगी।

इस योजना का खास मकसद छोटे किसानों को तकनीक, जानकारी, मार्केट और ऊर्जा जैसे जरूरी संसाधनों से जोड़ना है ताकि वे अपनी खेती को लाभदायक बना सकें। आज भी भारत में कई किसान ऐसे हैं जिनके पास बहुत कम ज़मीन है या फिर खेती के लिए जरूरी संसाधनों की कमी है। ऐसे में यह योजना उनके जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है।

योजना के मुख्य बिंदु:
योजना से देश के 100 जिलों के छोटे किसानों को फायदा मिलेगा।

हर जिले में 100-100 किसान मॉडल फार्मर के रूप में तैयार किए जाएंगे।

कुल मिलाकर पूरे देश में 1 लाख किसानों को खेती की नई तकनीकों की ट्रेनिंग दी जाएगी।

ये किसान बाकी किसानों को भी सिखाएंगे और प्रेरित करेंगे।

5 साल में 24,000 करोड़ रुपये का निवेश:

सरकार अगले 5 साल में इस योजना के लिए 24 हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी। यह पैसा किसानों को नई तकनीक, प्रशिक्षण, बीज, मशीनें, सौर ऊर्जा और बाजार तक पहुंच के लिए दिया जाएगा। इसके अलावा किसानों की उपज की प्रोसेसिंग और मार्केटिंग पर भी जोर दिया जाएगा ताकि उन्हें अच्छे दाम मिल सकें।

हर जिले में 1000 मॉडल खेत बनाए जाएंगे जहां आधुनिक तकनीक से खेती की जाएगी। ये खेत बाकी किसानों के लिए सीखने का केंद्र बनेंगे। यहां किसानों को जैविक खेती, ड्रिप सिंचाई, सौर ऊर्जा से चलने वाले पंप, मल्टी-क्रॉपिंग (एक साथ कई फसलें) जैसी तकनीकों के बारे में जानकारी दी जाएगी।

किसानों को दी जाएगी खास ट्रेनिंग:इस योजना के तहत किसानों को खेती के नए तरीके सिखाए जाएंगे ताकि वे कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमा सकें।

उन्हें बताया जाएगा कि कैसे वे अपनी फसल को सीधे बाजार तक पहुंचा सकते हैं, कैसे फसल को प्रोसेस करके उसका मूल्य बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा सरकार किसानों को बीज और खाद भी सस्ती दरों पर उपलब्ध कराएगी।

योजना से जुड़े अन्य फायदे:

ऊर्जा और सिंचाई के साधनों में सुधार:
किसानों को सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई पंप दिए जाएंगे। इससे डीजल और बिजली पर खर्च कम होगा और पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा।

कृषि उत्पादों का प्रोसेसिंग और मार्केटिंग:
किसान अपनी फसल को प्रोसेस करके बाजार में बेच सकेंगे जिससे उन्हें ज्यादा मुनाफा मिलेगा। उदाहरण के लिए टमाटर से सॉस या अचार बनाकर बेचना, या गेहूं को आटा बनाकर पैकिंग करके बेचना।

महिलाओं को मिलेगा रोजगार:
इस योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को भी रोजगार मिलेगा। प्रोसेसिंग यूनिट्स और कृषि आधारित छोटे उद्योगों में महिलाएं काम कर सकेंगी।

रोजगार के नए अवसर:
इस योजना के तहत कई नए छोटे उद्योग लगेंगे जिससे गांवों में ही युवाओं को काम मिल सकेगा और उन्हें शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा।

इस योजना की निगरानी के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर समितियां बनाई जाएंगी। ये समितियां सुनिश्चित करेंगी कि योजना का लाभसही लोगों तक पहुंचे। इसके अलावा, नीति आयोग हर साल योजना की समीक्षा करेगा और सुझाव देगा।

योजना के तहत राज्य सरकारों और विभिन्न मंत्रालयों के साथ मिलकर काम किया जाएगा ताकि हर स्तर पर सामंजस्य बना रहे। किसानों को दी जा रही मदद को ट्रैक करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा।

सरकार का कहना है कि ‘प्रधानमंत्री समग्र कृषि योजना’ किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक ठोस कदम है। इसका उद्देश्य सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है।

यदि यह योजना सफल होती है, तो यह देश के लाखों किसानों का जीवन पूरी तरह बदल सकती है। आज भी भारत की करीब 85% खेती छोटे और सीमांत किसान करते हैं। उनके पास संसाधनों की कमी है, वे जलवायु परिवर्तन, सूखा, बाढ़ जैसी प्राकृतिक समस्याओं से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।

‘प्रधानमंत्री समग्र कृषि योजना’ उनके लिए एक नई उम्मीद की किरण लेकर आई है। यह योजना किसानों को नई तकनीक, बेहतर बीज, सिंचाई, बाजार और प्रोसेसिंग जैसी सुविधाओं से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाएगी।

अगर योजना का क्रियान्वयन सही से किया गया, तो निश्चित रूप से यह भारत की खेती और किसानों की तस्वीर बदल सकती है।

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