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पूर्व उद्यान अधिकारी की फर्म को मिला लाभ

रोहित रजक रिपोर्ट भोपाल। नगर निगम भोपाल की उद्यान शाखा में बड़ा घोटाला सामने आया है। यह खुलासा आरटीआई कार्यकर्ता अजय पाटीदार द्वारा प्राप्त जानकारी के आधार पर हुआ है।

उन्होंने जानकारी दी कि उद्यान शाखा ने सिर्फ 3 महीनों के अंदर ही नियमों को दरकिनार करते हुए एक ही फर्म से ₹8 लाख 26 हजार 105 की खरीदी कर डाली। खास बात यह है कि यह फर्म नगर निगम के ही पूर्व उद्यान अधीक्षक भगवती प्रसाद कंडवाल की है।

एक ही फर्म को सभी 9 कोटेशन

जुलाई से नवंबर 2024 के बीच उद्यान शाखा ने पेड़-पौधे, कारपेड ग्रास, गोबर खाद, ट्री कटर मशीन, रसायनिक खाद और दवाइयां खरीदने के लिए कुल 9 कोटेशन जारी किए। हैरानी की बात यह है कि सभी कोटेशन केवल एक ही फर्म भगवती इंटरप्राइजेज को दिए गए।

बिना लाइसेंस रसायन और खाद की खरीदी

इस फर्म से ₹87,655 रुपये की रसायनिक खाद और दवाइयां भी खरीदी गईं। जबकि इस फर्म के पास ऐसी सामग्री बेचने का कोई लाइसेंस नहीं है। इसके बावजूद PWD के लाइसेंस के नाम पर दो गुना कीमत पर नगर निगम को सप्लाई दिखा दी गई।

टेंडर की बजाय छोटे-छोटे कोटेशन से बड़ा घोटाला

आरटीआई दस्तावेजों से यह बात सामने आई है कि जुलाई 2024 में ₹3.76 लाख की पेड़-पौधों और ग्रास की खरीदी चार अलग-अलग कोटेशन के माध्यम से की गई, जबकि नियमानुसार इतनी राशि के लिए एक बड़ा टेंडर निकाला जाना चाहिए था।

इसी तरह अगस्त 2024 में भी ₹1.85 लाख की खरीदी दो कोटेशन में की गई और दोनों कोटेशन एक ही तारीख 01 अगस्त 2024 को जारी किए गए। नियमानुसार इस रकम के लिए भी टेंडर होना चाहिए था।

नवंबर में फिर दोहराई गई गड़बड़ी

नवंबर 2024 में भी ₹2.64 लाख की खरीदी तीन अलग-अलग कोटेशन के माध्यम से की गई। पेड़-पौधों, खाद और रसायनिक दवाओं को इस बार भी दोगुने भाव में खरीदा गया। यहां भी नियमों को दरकिनार कर टेंडर नहीं किया गया।

अधिकारियों ने बांटी ‘रेवड़ियां’

इस पूरे मामले में नगर निगम के कार्यपालन यंत्री प्रमोद मालवीय और सहायक यंत्री हबीब उर रहमान पर आरोप है कि उन्होंने सभी 9 कोटेशन केवल एक ही फर्म को दिए और ₹8.26 लाख का लाभ पहुंचाया। यह फर्म खुद निगम के पूर्व अधिकारी की है।

वरिष्ठ अधिकारी ने नहीं जताई आपत्ति

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उद्यान शाखा के एडीसी देवेंद्र सिंह चौहान ने एक भी बार इन कोटेशनों पर कोई आपत्ति नहीं ली। इससे साफ है कि पूरे विभाग की मिलीभगत से यह कोटेशन घोटाला हुआ है।

शिकायतकर्ता की मांग

आरटीआई और सामाजिक कार्यकर्ता अजय पाटीदार ने इस घोटाले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि नगर निगम में भ्रष्टाचार के ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है ताकि सरकारी धन की बंदरबांट न हो।

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