कामना कासोटिया भोपाल:

अपराधों की सीमाएं हुईं धुंधली, मीडिया की जिम्मेदारी और बढ़ी – पुलिस कमिश्नर की मास्टर क्लास
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल में आयोजित विशेष मास्टर क्लास में पुलिस कमिश्नर हरिनारायणचारी मिश्रा ने पत्रकारिता के छात्रों को अपराध और मीडिया की बदलती भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी । उन्होंने कहा किआज का समय अपराध और सूचना के मामले में बेहद तेज़ और जटिल हो गया है। अपराध पहले जहाँ केवल एक शहर या राज्य की सीमाओं तक सीमित रहते थे, वहीं अब उनकी भौगोलिक सीमाएं समाप्त हो चुकी हैं। तकनीक और इंटरनेट के ज़रिए अपराध देश के एक कोने से दूसरे कोने तक फैल रहे हैं। इस बदलते दौर में मीडिया की भूमिका और भी अहम हो गई है। यह बात पुलिस कमिश्नर हरिनारायणचारी मिश्रा ने पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहे छात्रों से बातचीत के दौरान कही।
पुलिस कमिश्नर ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि पत्रकारिता केवल खबरें दिखाने या लिखने का नाम नहीं है, बल्कि यह समाज में जागरूकता और जिम्मेदारी का भी माध्यम है। आज सोशल मीडिया के दौर में खबरें पलभर में वायरल हो जाती हैं, लेकिन हर खबर सच्चाई पर आधारित नहीं होती। इसीलिए पत्रकारों को चाहिए कि वे तथ्यों की पुष्टि किए बिना कोई भी खबर प्रकाशित या प्रसारित न करें।
अपराध की बदलती तस्वीर
हरिनारायणचारी मिश्रा ने बताया कि पहले अपराध एक निश्चित दायरे तक ही सीमित रहते थे। उदाहरण के लिए, यदि किसी जिले में चोरी या धोखाधड़ी होती थी तो उसका असर केवल उसी जिले तक दिखाई देता था। लेकिन अब इंटरनेट फ्रॉड, साइबर क्राइम और ऑनलाइन ठगी के मामलों ने अपराध को अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय बना दिया है। अपराधी अब मोबाइल फोन और कंप्यूटर की मदद से कहीं से भी वारदात कर सकते हैं। ऐसे में पुलिस के साथ-साथ मीडिया की भी जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वह आम जनता को सचेत करे।
मीडिया की अहम भूमिका
कमिश्नर ने कहा कि मीडिया अपराधों को रोकने में पुलिस का बड़ा सहयोगी बन सकता है। जब मीडिया सही और तथ्यात्मक खबरें जनता तक पहुँचाता है तो लोगों में जागरूकता बढ़ती है और अपराधियों के इरादों पर अंकुश लगता है। उन्होंने छात्रों को यह भी समझाया कि सनसनीखेज या भ्रामक खबरें समाज में अफवाहें फैलाती हैं और कभी-कभी निर्दोष लोगों के लिए मुसीबत भी बन जाती हैं।
मीडिया को चाहिए कि वह घटनाओं की रिपोर्टिंग करते समय पीड़ित की निजता और संवेदनशीलता का ध्यान रखे। खासकर बच्चों और महिलाओं से जुड़े मामलों में पत्रकारों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
सोशल मीडिया का असर
आजकल हर व्यक्ति के हाथ में स्मार्टफोन है और हर कोई खुद को रिपोर्टर समझने लगा है। सोशल मीडिया पर हर रोज़ लाखों खबरें, वीडियो और पोस्ट डाली जाती हैं। लेकिन इनमें से बहुत सारी जानकारी अधूरी या भ्रामक होती है। पुलिस कमिश्नर ने कहा कि पत्रकारिता के छात्रों को समझना होगा कि असली पत्रकार वही है जो सच्चाई की पड़ताल करे और जनता को सही सूचना दे।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि हाल ही में बालाघाट में बच्चा चुराने की अफवाह ने माहौल बिगाड़ दिया था, जबकि हकीकत कुछ और थी। इसी तरह इंदौर में एक पुरानी वीडियो को नए अपराध से जोड़कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया। इन दोनों मामलों ने साबित कर दिया कि बिना जांच-पड़ताल के खबरों को साझा करना कितना खतरनाक हो सकता है।

पत्रकारिता छात्रों से संवाद
कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने भी कई सवाल पूछे। कुछ छात्रों ने पूछा कि पुलिस और मीडिया के बीच अक्सर टकराव की स्थिति क्यों बन जाती है? इस पर मिश्रा ने स्पष्ट किया कि पुलिस और मीडिया दोनों का मकसद एक ही है – समाज की सुरक्षा और शांति। फर्क सिर्फ इतना है कि पुलिस अपराध रोकने और अपराधियों को पकड़ने का काम करती है, जबकि मीडिया समाज को सूचित और जागरूक करता है। यदि दोनों मिलकर काम करें तो अपराध पर बेहतर नियंत्रण पाया जा सकता है।
पुलिस कमिश्नर हरिनारायणचारी मिश्रा की यह मास्टर क्लास छात्रों के लिए बेहद उपयोगी साबित हुई। उन्होंने साफ कहा कि पत्रकारिता केवल एक करियर नहीं है बल्कि समाज सेवा का माध्यम है। आज अपराध की सीमाएं खत्म हो चुकी हैं और अपराधी कहीं भी बैठकर अपराध कर सकते हैं। ऐसे में मीडिया की जिम्मेदारी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।
पत्रकारों को चाहिए कि वे खबरों को सनसनी बनाने के बजाय जिम्मेदारी के साथ तथ्य प्रस्तुत करें। तभी समाज में सच्ची जागरूकता आएगी और अपराधों पर अंकुश लगाया जा सकेगा।
