Ranu Yadav: यमन में भारतीय नर्स निमिषा प्रिया मिली सजा ए मौत की तारीख तो टल गई है लेकिन उनको माफी दिलाने का कोई रास्ता अभी भी नजर नहीं आ रहा है। सारी कोशिशें नाकामयाब होती दिख रही है।
निमिषा प्रिया को उनके बिजनेस पार्टनर यमनी नागरिक तलाल अब्दो महदी के हत्या के दोषी के लिए मौत की सजा सुनाई गई है। 16 जुलाई को ही उनके सजा ए मौत की तारीख तय हुई थी। लेकिन इसे टाल दिया गया है। और मौत की अगली तारीख अभी सामने भी आई है। इसे टालने के लिए भारत सरकार की तरफ से काफी प्रयास किया जा रहा है।
इन सब मामलों पर तलाल अब्दो के भाई अब्देलफतह महदी का कहना है कि इस मामले पर माफी दिलाने का कोई गुंजाइश नहीं है। हम चाहते है कि शरिया कानून के तहत किसास नियम का पालन हो।
इस्लाम में ‘किसास’ क्या होता ? और इसके तहत सजा कैसे होती है?
किसास एक अरबी शब्द है इसका अर्थ होता है ‘बदला लेना‘। यह उन लोगों के लिए सजा है जो किसी शारीरिक चोट जैसे अपराध करते है।जैसे किसी के जान के बदले जान यानी जितनी तकलीफ किसी को दी गई हो उस अपराधी को भी उतनी ही तकलीफ मिले।
ईरान की दंड संहिता की धारा 55 पीड़ित या पीड़ित के परिवार को अपराधी के शरीर पर समान चोट पहुँचाने का अधिकार देती है, बशर्ते उन्हें अदालत की अनुमति हो।
“अर्थात इरादतन हत्या या गंभीर शारीरिक चोट पहुंचाने वाले को बदले में समान सजा देना। बशर्ते इस प्रकिया में न्याय की सभी शर्ते पूरी हो रही हो”।
पीड़ित परिवार को 10 लाख डॉलर ब्लड मनी के तौर पर ऑफ़र किए
किसास में माफी की भी गुंजाइश है लेकिन यह तभी संभव है जब पीड़ित पक्ष ऐसा चाहे। यदि महदी के परिवार वाले चाहे तो वह एक रकम लेकर निमिषा प्रिया को माफ कर सकते है जिसे किसास में ‘ब्लड मनी ‘कहते है।
किसास किसी देश का कानून नहीं है बल्कि यह कुरान का कानून है। उसको लागू करने के लिए किसी देश को इस्लामिक शरिया के तहत होना आवश्यक है।
बीबीसी के रिपोर्ट के अनुसार,निमिषा के वकीलों ने ये बताया था कि यमन के शरिया क़ानून के मुताबिक़ निमिषा के परिवारवालों ने पीड़ित परिवार को 10 लाख डॉलर ब्लड मनी के तौर पर ऑफ़र किए थे। लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका। अब ऐसा देखा जा रहा है कि निमिषा को बचाने का एक मात्र रास्ता है महदी के परिवार वालों की माफी।
