रिपोर्ट रोहित रजक भोपाल। मध्यप्रदेश में चुनाव आयोग और प्रशासन की जांच में एक चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है। राज्य में हजारों ऐसे पते पाए गए हैं।
जहां एक ही घर में दर्जनों से लेकर सैकड़ों वोटर रजिस्टर्ड हैं। यह मामला मतदाता सूची में फर्जी नाम जोड़ने और चुनाव को प्रभावित करने की गंभीर साजिश की ओर इशारा करता है।
जांच में निकले हैरान करने वाले आंकड़े
राज्य के विभिन्न जिलों और नगरीय निकायों में मतदाता सूची की जांच की गई। इसमें पता चला कि:
1696 पते ऐसे हैं, जहां एक घर में 50 से अधिक वोटर दर्ज हैं।
11 से 20 वोटर वाले पते – 7,95,515
21 से 30 वोटर वाले पते – 67,741
31 से 40 वोटर वाले पते – 9,533
41 से 50 वोटर वाले पते – 3,174
50 से अधिक वोटर वाले पते – 1,696
इसका मतलब यह है कि राज्य में लाखों वोटर ऐसे हैं, जो असल में वहां रहते ही नहीं या जिनके नाम गलत तरीके से मतदाता सूची में जोड़े गए हैं।
चंबल में सबसे ज्यादा फर्जीवाड़ा
इस जांच में यह बात सामने आई कि चंबल संभाग में फर्जी वोटरों की संख्या सबसे ज्यादा है। चंबल के कई जिलों और निकायों में ऐसे पते पाए गए जहां 20 से ज्यादा वोटर दर्ज हैं।
नगर निगम और जिलों में स्थिति
नगरीय निकायों के आंकड़े बताते हैं कि –
इंदौर नगर निगम फर्जी वोटरों के मामले में पहले नंबर पर है।
ग्वालियर नगर निगम दूसरे स्थान पर।
भोपाल नगर निगम तीसरे स्थान पर।
इसके अलावा –
उज्जैन नगर निगम – 5,172 पते
सतना – 2,612 पते
छिंदवाड़ा – 2,352 पते
सिंगरौली – 3,975 पते
इन जगहों पर मतदाता सूची में गड़बड़ियां काफी बड़ी मात्रा में पाई गई हैं।
फर्जी नाम कैसे जुड़े ?
चुनाव आयोग ने यह जांच जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम (GIS) और भौगोलिक लोकेशन वेरीफिकेशन के आधार पर कराई। इसमें घर के पते और वोटर की संख्या का डिजिटल मिलान किया गया। जब किसी पते पर वोटरों की संख्या सामान्य सीमा से बहुत ज्यादा पाई गई, तो उसे संदिग्ध की सूची में डाल दिया गया।
कई जगह ऐसे पते मिले जो असल में खाली पड़े हैं या जहां दुकानें, गोदाम, दफ्तर या छोटी सी झोपड़ी है, लेकिन वहां वोटरों की संख्या 50, 100 या उससे भी ज्यादा है।
हर जगह फैली गड़बड़ी
रिपोर्ट में बताया गया है कि यह गड़बड़ी केवल किसी एक जिले तक सीमित नहीं है। गड़बड़ी वाले पते कई जगहों पर हैं, जैसे –
सागर
पन्ना
शहडोल
सीधी
बैतूल
राजगढ़
खरगोन
खंडवा
धार
मंदसौर
नीमच
भिंड
मुरैना
इन सभी जिलों में मतदाता सूची में बड़ी गड़बड़ी मिली है।
चुनाव पर असर
विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर फर्जी वोटर जुड़ने से चुनाव के नतीजों पर सीधा असर पड़ सकता है। अगर एक ही घर के पते पर 50-100 वोटर हैं, तो यह असल मतदाताओं की राय को दबा सकता है और गलत तरीके से किसी उम्मीदवार को फायदा पहुंचा सकता है।
अब क्या होगा ?
चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि अब इन सभी संदिग्ध नामों का फिजिकल वेरीफिकेशन यानी मौके पर जाकर जांच होगी। इसमें –
घर का पता चेक किया जाएगा।
वहां रहने वाले असली वोटरों की गिनती होगी।
जो नाम गलत पाए जाएंगे, उन्हें मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा।
यह प्रक्रिया आने वाले चुनावों से पहले पूरी करने की कोशिश की जाएगी ताकि फर्जी वोटिंग रोकी जा सके।
जनता की चिंता
कई लोगों का कहना है कि मतदाता सूची में फर्जी नाम जुड़ने से असली लोकतंत्र पर खतरा है। अगर चुनाव में फर्जी वोट डाले जाते हैं, तो जनता की असली राय सामने नहीं आ पाएगी। लोग मांग कर रहे हैं कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी गड़बड़ी न हो।
यह मामला बताता है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना कितना जरूरी है। मतदाता सूची में फर्जी नाम जोड़ना लोकतंत्र की नींव को हिलाने जैसा है।
अगर समय रहते इन गड़बड़ियों को ठीक नहीं किया गया, तो चुनाव के नतीजे जनता की असली इच्छा का प्रतिनिधित्व नहीं करेंगे।
चुनाव आयोग की यह पहल सही दिशा में एक कदम है, लेकिन इसे पूरी तरह से लागू करने के लिए सख्त निगरानी और तेज कार्रवाई जरूरी है।
