कामना कासोटिया भोपाल:
भोपाल का ‘मछली मामला’: राजनीति, अपराध और संरक्षण के सवालों से घिरा
भोपाल में हाल ही में सामने आया “मछली मामला” पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है। इस मामले ने ना केवल अपराध और कानून-व्यवस्था को लेकर लोगों को चिंता में डाला है, बल्कि राजनीतिक संरक्षण और जवाबदेही को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में मुख्य आरोपी शारिक अहमद, जिसे आमतौर पर ‘शारिक मछली’ के नाम से जाना जाता है, के अवैध निर्माण पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। परंतु इस कार्रवाई के बाद जो तस्वीरें और जानकारियाँ सामने आईं, उन्होंने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है।
कौन है शारिक मछली?
शारिक अहमद भोपाल का एक बड़ा मछली कारोबारी है। उसका नेटवर्क मध्य प्रदेश के कई जिलों में फैला हुआ है। कुछ सालों में उसकी संपत्ति, रुतबा और पहचान तेजी से बढ़ी। लोगों के बीच उसकी पहचान एक “प्रभावशाली व्यक्ति” के रूप में थी। लेकिन जुलाई 2025 में एक मामले ने उसकी सारी ताकत पर सवाल खड़े कर दिए।
शारिक का भतीजा यासीन मछली, एक युवती की शिकायत पर पुलिस के हत्थे चढ़ा। युवती ने आरोप लगाया कि यासीन ने उसका यौन शोषण किया, ब्लैकमेल किया और उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव भी बनाया। मामले में यासीन के पास से एमडी ड्रग्स, एक पिस्तौल और कई आपत्तिजनक वीडियो क्लिप भी बरामद हुईं।
प्रशासन की बुलडोजर कार्रवाई
शिकायत और सबूत सामने आने के बाद भोपाल पुलिस और प्रशासन हरकत में आया। 30 जुलाई को भारी पुलिस बल के साथ शारिक मछली के अवैध फॉर्महाउस, वेयरहाउस, मछली फैक्ट्री और आलीशान बंगले पर बुलडोजर चलाया गया। प्रशासन ने कहा कि यह कार्रवाई अवैध निर्माण और आपराधिक गतिविधियों से कमाई गई संपत्ति के खिलाफ है।
भोपाल के मंत्री विश्वास सारंग और मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि अपराधी चाहे कोई भी हो, सरकार सख्ती से निपटेगी।
राजनीतिक सरगर्मियां तेज
हालांकि इस कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें वायरल हुईं, जिनमें शारिक मछली को प्रदेश के कुछ वरिष्ठ मंत्रियों और राजनीतिक नेताओं के साथ देखा गया। कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे को विधानसभा में जोरदार तरीके से उठाया। विधायक उमंग सिंगार ने कहा, “जिन लोगों के नाम, फोटो और मंत्रियों के साथ रिश्ते सामने आए हैं, उनसे कोई सवाल नहीं किया जा रहा, न ही कोई इस्तीफा हुआ है। यह साफ दर्शाता है कि आरोपी को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था।”
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि अगर शारिक किसी आम व्यक्ति की तरह होता, तो इतनी देर तक खुली छूट नहीं मिलती। पार्टी ने यह भी कहा कि सत्ता में बैठे लोग अगर ऐसे अपराधियों से जुड़े दिखते हैं, तो यह प्रदेश की कानून व्यवस्था और सरकार की नीयत पर बड़ा सवाल है। विरोध में कांग्रेस ने विधानसभा से वॉकआउट भी किया।
मानवाधिकार संगठनों की चिंता
मानवाधिकार संगठनों ने इस पूरे मामले में दोतरफा चिंता जताई है। पहली चिंता – युवतियों के साथ हो रही ब्लैकमेलिंग, शोषण और धर्म परिवर्तन की साजिशें। और दूसरी – बिना सुनवाई के संपत्तियों पर सीधे बुलडोजर चलाना। कुछ संगठनों ने इस बात पर जोर दिया कि दोषियों को सजा जरूर मिले, लेकिन कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाए।
जनता में गुस्सा और भ्रम
भोपाल और आसपास के इलाकों में इस मामले ने आम लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। एक तरफ लोग प्रशासन की कार्रवाई को सही बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ राजनीतिक संबंधों पर चुप्पी से नाराज़ भी हैं। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने सवाल उठाए – “क्या हर अपराधी के खिलाफ इसी तरह कार्रवाई होती है?”, “क्या जिन नेताओं के साथ शारिक की तस्वीरें हैं, उनसे कोई पूछताछ होगी?”, “क्या यह सिर्फ दिखावा है?”
भोपाल का ‘मछली मामला’ अब केवल एक आपराधिक केस नहीं रहा, बल्कि यह मध्य प्रदेश की राजनीति, प्रशासन और समाज के लिए एक आईना बन गया है। सवाल यह नहीं है कि कार्रवाई हुई या नहीं, सवाल यह है कि कार्रवाई सभी के लिए समान है या नहीं। अगर राजनीति और अपराध के रिश्तों पर ईमानदारी से नकेल नहीं कसी गई, तो जनता का भरोसा टूटेगा।
प्रदेश की जनता अब यह देख रही है कि क्या इस मामले में सभी जिम्मेदार लोगों से जवाब मांगा जाएगा? या फिर यह मामला भी कुछ दिनों बाद भुला दिया जाएगा?
