कामना कासोटिया, भोपाल: जबलपुर से बड़ी खबर सामने आ रही है। आदिम जाति कल्याण विभाग के डिप्टी कमिश्नर जगदीश सरवटे एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। इस बार उनके जबलपुर स्थित सरकारी आवास पर आर्थिक अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ (EOW) द्वारा की गई छापेमारी में बाघ की खाल बरामद हुई है। इतना ही नहीं, उनके पास से लगभग सात करोड़ रुपये की संपत्ति भी मिली है, जो उनकी आय से कहीं अधिक मानी जा रही है।

जानकारी के अनुसार, ईओडब्ल्यू को लंबे समय से डिप्टी कमिश्नर सरवटे की संपत्ति और जीवनशैली को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर जब बुधवार को उनके घर पर छापा मारा गया, तो अफसरों को चौंकाने वाली चीज़ें देखने को मिलीं। उनके घर में बिछी हुई जो चटाई सी दिख रही थी, असल में वह बाघ की खाल थी।

पूछताछ में पता चला कि सरवटे इस खाल का उपयोग बैठने के लिए करते थे, यानी इसे आसन की तरह इस्तेमाल किया जाता था। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बाघ की खाल करीब 30 साल पुरानी बताई जा रही है। हालांकि, वन विभाग की टीम इस खाल की जांच कर रही है कि यह असली है या नकली, लेकिन प्रारंभिक तौर पर इसे असली माना जा रहा है।बाघ की खाल का रखना वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत पूरी तरह से अवैध है।

गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है बाघ की खाल रखना

अगर कोई व्यक्ति बाघ की खाल अपने पास रखता है, तो यह गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है, जिसमें कड़ी सजा का प्रावधान है। ऐसे में डिप्टी कमिश्नर जैसे उच्च पद पर बैठे व्यक्ति के घर से इसका मिलना बेहद गंभीर मामला बन जाता है। ईओडब्ल्यू की टीम को छापे के दौरान कई दस्तावेज, जमीन-जायदाद के कागज़ात, बैंक खातों की डिटेल और नकद रुपए भी मिले हैं। प्रारंभिक आंकलन के अनुसार, सरवटे के पास लगभग सात करोड़ की संपत्ति है, जो उनकी ज्ञात आय से काफी अधिक है। इससे साफ है कि उन्होंने आय से अधिक संपत्ति अर्जित की है।ईओडब्ल्यू के अधिकारी इस पूरे मामले की जांच कर रहे हैं और वन विभाग को भी इसकी जानकारी दी गई है।

वन्यजीव अधिनियम के तहत हो सकती है कार्रवाई

अब इस केस में वन्यजीव अधिनियम के तहत अलग से कार्रवाई हो सकती है। सरवटे इस समय जबलपुर में पदस्थ हैं और आदिम जाति कल्याण विभाग के डिप्टी कमिश्नर हैं। इससे पहले भी उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं, लेकिन इस बार मामला बेहद गंभीर और संवेदनशील है क्योंकि इसमें वन्यजीवों की अवैध तस्करी से जुड़ा पहलू भी सामने आया है।इस खुलासे से प्रशासनिक गलियारों में हलचल मच गई है।

लोगों में भी इस बात को लेकर आक्रोश है कि एक वरिष्ठ अधिकारी जो आदिवासियों और वन्य क्षेत्रों के कल्याण के लिए जिम्मेदार होता है, वही ऐसे गैरकानूनी कार्यों में शामिल पाया गया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और प्रशासन इस मामले में क्या कड़ा कदम उठाते हैं और दोषी अधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

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