सिंधिया महल



मध्य प्रदेश। वंदना रवीन्द्र:
देश में भ्रष्टाचार राज्यों की लिस्ट में पहले नंबर पर भले ही महाराष्ट्र और दूसरे नंबर पर राजस्थान हो, लेकिन मध्य प्रदेश में भी भ्रष्टाचार कम नहीं है यहां लोगों से टैक्स वसूल कर बनने वाली सड़क भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही है।

मध्य प्रदेश का स्मार्ट सिटी कहलाने वाला शहर ग्वालियर इन दिनों जर्जर सड़कों के कारण सुर्खियों में है। हो भी क्यों न दरअसल, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के महल से 500 मीटर दूर कुछ दिनों पहले सड़क बनी, जो चार बार की बारिश भी नहीं झेल सकी। महज एक महीने पहले बनी ये सड़क बीते 10 दिनों में 5 से 7 बार धंस चुकी है। अब तो इस सड़क में जगह जगह इस तरह के गड्ढे हो गए हैं, जैसे सड़क का नहीं बल्कि सड़क के नीचे किसी ने सुरंग का निर्माण किया गया हो।

जानकारी के मुताबिक, ग्वालियर में ज्योतिरादित्य सिंधिया के महल रोड का निर्माण हाल ही में 19 करोड़ रुपये के वॉटर ड्रेन प्रोजेक्ट के तहत किया गया था। इस परियोजना में माधव नगर से चेतकपुरी के बीच लगभग 4.30 करोड़ रुपये की लागत से नई सड़क को बनाया गया। शुरुआत में शहरवासियों को उम्मीद थी कि, अब जलभराव और खराब सड़क की समस्या से राहत मिलेगी, लेकिन पहली ही बारिश ने सारी योजनाओं की पोल खोल दी। स्थानीय लोगों का कहना है कि, सड़क निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल करने के साथ-साथ काम में लापरवाही बरती गई है। इस सड़क पर कुछ महीने पहले ही पाइपलाइन बिछाई गई थी, जिससे करीब 6 महीने तक लोगों को आने-जाने में परेशानी होती रही।  औऱ इसके बाद जब सड़क का निर्माण भी हुआ तो सड़क एक पूरा मानसून नहीं झेल सकी और धंस गई।

हालांकि, लगातार मिल रही शिकायतों और सड़क की हालत को देखते हुए ग्वालियर की कलेक्टर रूचिका सिंह चौहान ने जांच कराने का आश्वासन दिया है। मैडम चौहान का कहना है कि, चेतकपुरी रोड का एक मामला संज्ञान में आया है। जिसके लिए आयुक्त नगर निगम को निर्देशित किया गया है। उसका कोर कटिंग कर एक बार सैंपल लैब के लिए जरूर भेजा जाएगा। ताकि पता लग सके कि किस मानक का मैटेरियल इस्तेमाल किया गया है। और किस लेवल पर लापरवाही हुई है जांच के बाद यह भी सामने आ जाएगा। जिसके बाद कार्रवाई की जाएगी।

क्या हो सकते हैं सड़क टूटने के कारण?

भारत में सड़कें अक्सर थोड़ी-सी बारिश में भी टूटने या उखड़ने लगती हैं। इसके पीछे कई तकनीकी, प्रशासनिक और पर्यावरणीय कारण हो सकते हैं जैसे सड़कों के निर्माण में घटिया गुणवत्ता की सामग्री जैसे घटिया बिटुमेन, सीमेंट, बजरी का प्रयोग करना, जाहिर है भ्रष्टाचार के चलते कॉन्ट्रैक्टर कम लागत में ज़्यादा मुनाफा कमाने के लिए निर्माण स्तर गिरा देते हैं। इसके अलावा घटिया इंजीनियरिंग डिजाइन भी इसका कारण हो सकती हैं। सड़के तब भी कमजोर होती हैं जब बारिश के पानी के बहाव की सही व्यवस्था नहीं होती। जब सड़कों की ढलान ठीक से नहीं बनाई जाती, जिससे पानी जमा होता है और सड़क की परतें कमज़ोर होती जाती हैं। सड़क के किनारे जल निकासी का प्रावधान नहीं होता, जिससे पानी सड़क पर ही खड़ा रहता है और गड्ढे बन जाते हैं। अनियंत्रित और घटिया रखरखाव भी कारण हो सकता है। सड़कों की समय-समय पर मरम्मत और निरीक्षण जरुरी होता है। लेकिन कई बार मरम्मत सिर्फ ऊपरी परत तक सीमित रहती है, जिससे थोड़ी सी बारिश में सड़क फिर खराब हो जाती है।

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती हैं सड़कें

सड़कों के बार-बार टूटने के पीछे ठेकेदार और अफसरों की मिलीभगत यानि भ्रष्टाचार  भी अहम वजह है। निर्माण के समय सैंपल जाँच और निगरानी के कागजों में हेराफेरी होती है। निर्धारित मानक का पालन नहीं किया जाता। और फिर भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश के समय मिट्टी पानी सोखकर फुल जाती है जिससे सड़क की नींव कमजोर हो जाती है। काली मिट्टी वाले क्षेत्रों में सड़कें जल्दी फट जाती हैं। कभी-कभी ओवरलोडेड वाहनों का दबाव जैसे भारी ट्रक और बसें तय सीमा से ज़्यादा लोड लेकर चलती हैं, जिससे सड़कें जल्दी टूटती हैं। खासकर जब वे पानी में गीली हो जाती हैं। यहां तक कि, कई बार सड़कें सिर्फ चुनावी घोषणा के तहत बनाई जाती हैं, जल्दबाज़ी में, बिना उचित प्लानिंग रामभरोसे ही होती हैं।

समाधान क्या हो सकते हैं?

इस समस्या का उचित समाधान भी है। जैसे घटिया निर्माण की ज़रूरी है कि सख्त निगरानी, थर्ड पार्टी ऑडिट और GPS आधारित मटेरियल ट्रैकिंग होनी चाहिए। जल निकासी के लिए हर सड़क के साथ साइड-ड्रेनेज का डिजाइन अनिवार्य किया जाना चाहिए। रखरखाव की बात करें तो, समय-समय पर रोड सेफ्टी ऑडिट और मरम्मत होनी चाहिए। वहीं डिज़ाइन करते समय अगर IRC (Indian Road Congress) और MoRTH के मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए तो जाहिए है इस तरह की समस्या से बचा जा सकता है।

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