रोहित रजक, भोपाल। इन दिनों शहर के कई अस्पतालों में एक अजीब स्थिति सामने आ रही है। न बुखार है, न कोई बड़ी बीमारी, फिर भी कई लोगों की प्लेटलेट्स की संख्या अचानक कम हो रही है। सबसे हैरानी की बात यह है कि जिन मरीजों में प्लेटलेट्स घट रही हैं, उन्हें न तो डेंगू है और न ही मलेरिया या कोई और गंभीर संक्रमण। इस नई परेशानी को लेकर लोग घबरा गए हैं और अस्पतालों में प्लेटलेट्स की मांग तेजी से बढ़ गई है।
क्या हैं प्लेटलेट्स और क्यों जरूरी हैं?
प्लेटलेट्स खून में मौजूद ऐसे कण होते हैं जो शरीर में खून को जमाने का काम करते हैं। यदि शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या बहुत कम हो जाए तो मामूली कटने या चोट लगने पर भी खून बहता रहता है और रुकता नहीं। सामान्य व्यक्ति के शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या 1.5 लाख से 4.5 लाख प्रति माइक्रोलीटर होती है। यदि यह 50 हजार से नीचे आ जाए तो हालत गंभीर हो सकती है।
डॉक्टरों की बढ़ी चिंता
शहर के बड़े अस्पतालों के डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें इस तरह की समस्या पहले नहीं दिखी थी। कुछ दिनों से लगातार ऐसे मरीज आ रहे हैं जिन्हें न तो बुखार है, न कोई बड़ी बीमारी, लेकिन प्लेटलेट्स की संख्या 20 हजार, 30 हजार या उससे भी कम हो रही है।
डॉक्टरों के अनुसार, यह स्थिति सामान्य नहीं है और इसके पीछे का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। भोपाल के कई ब्लड बैंकों में इन दिनों प्लेटलेट्स की मांग काफी बढ़ गई है। वहीं, दानदाता कम हो रहे हैं। मरीजों के परिजन प्लेटलेट्स के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटक रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्थिति यही रही तो ब्लड बैंकों में प्लेटलेट्स की कमी होना तय है। इसलिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को प्लेटलेट्स डोनेट करने के लिए जागरूक किया जाना चाहिए।
प्लेटलेट्स कम होने की पहचान कैसे करें?
प्लेटलेट्स कम होने के कुछ सामान्य लक्षण होते हैं, जैसे—
1)शरीर में अचानक नीले-नीले निशान बन जाना
2)नाक या मसूड़ों से खून आना
3)कमजोरी और थकान
4)अचानक ज्यादा मात्रा में मासिक धर्म आना
5)त्वचा पर लाल-नीले चकत्ते।
यदि किसी को ये लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत ब्लड टेस्ट करवा कर प्लेटलेट्स की संख्या जाँचना जरूरी है।
डॉक्टरों की सलाह: डरें नहीं, सतर्क रहें
डॉक्टरों का कहना है कि प्लेटलेट्स कम होने की स्थिति गंभीर हो सकती है लेकिन सभी मामलों में घबराने की जरूरत नहीं है। कई बार वायरस या शरीर में सूजन के कारण प्लेटलेट्स घट सकते हैं। अगर समय पर जांच और इलाज हो जाए तो स्थिति नियंत्रण में आ सकती है।
क्या हो सकता है कारण?
विशेषज्ञों के अनुसार, मौसमी बदलाव, वायरल संक्रमण, या शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में गड़बड़ी से भी प्लेटलेट्स कम हो सकते हैं। कुछ मामलों में शरीर खुद ही प्लेटलेट्स को नष्ट कर देता है जिसे ‘ITP’ (Idiopathic Thrombocytopenic Purpura) कहा जाता है। इस स्थिति में शरीर की इम्यून सिस्टम प्लेटलेट्स को दुश्मन समझ कर खत्म करने लगती है।
समय पर जांच और प्लेटलेट्स डोनेशन जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते यदि प्लेटलेट्स की जांच कर ली जाए और जरूरत अनुसार डोनेशन मिले तो जान बचाई जा सकती है। अस्पतालों में प्लेटलेट्स डोनेशन की प्रक्रिया सुरक्षित होती है और यह सामान्य रक्तदान की तरह ही होती है। लोगों को आगे आकर इसमें भाग लेना चाहिए।
सरकार और प्रशासन से अपेक्षा
स्वास्थ्य विभाग से अपेक्षा की जा रही है कि इस तरह की समस्याओं पर तत्काल अध्ययन किया जाए और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। साथ ही ब्लड बैंकों में पर्याप्त प्लेटलेट्स की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। यदि स्थिति गंभीर हो तो विशेष जागरूकता अभियान भी चलाए जाने की जरूरत है।

